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3 माह में 18 हजार राजस्व प्रकरणों का निराकरण कर जुटाए 15 करोड़

दुर्ग. लगातार मानिटरिंग और युद्धस्तर पर किये गये कार्य के बाद राजस्व प्रकरणों को निपटाने में दुर्ग जिले में अहम सफलता मिली है। मार्च से लेकर अब तक तीन महीनों में विभिन्न न्यायालयों में राजस्व के 18 हजार लंबित प्रकरण निपटा दिये गये हैं। इनसे पंद्रह करोड़ रुपए की राजस्व प्राप्ति भी हुई है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राजस्व प्रकरणों के प्रभावी निपटारे के लिए विशेष रूप से निर्देशित किया था। कम समय में तेजी से और गुणवत्तापूर्वक मामलों का निपटारा हो सके, इसके लिए विशेष रणनीति बनाई गई। 15 जून तक प्रकरणों को निपटाने के निर्देश दिये गये और उचित रणनीति और कठिन परिश्रम से यह संभव हो सका।

राजस्व न्यायालयों का किया निरीक्षण

कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने हर सप्ताह राजस्व न्यायालयों में प्रकरणों की मानिटरिंग के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किये। कलेक्टर हर सप्ताह स्वयं राजस्व न्यायालयों में पहुंचे। उन्होंने हर न्यायालय में प्रकरणों की स्थिति देखी। यह देखा कि कहीं अपंजीकृत प्रकरण तो नहीं रह गये हैं। इसका अच्छा असर हुआ और अठारह हजार प्रकरण इन तीन महीनों में निपटा दिये गये हैं। इनसे पंद्रह करोड़ रुपए की राजस्व प्राप्ति भी हुई है।

अपर कलेक्टर पद्मिनी भोई ने बताया कि राजस्व की समीक्षा बैठकों में नियमित रूप से मानिटरिंग हुई। नोडल अधिकारियों की रिपोर्ट की मानिटरिंग हुई। राजस्व अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिये गये कि अविवादित मामलों में तुरंत निर्णय लिया जाए। इसके बाद विवादित प्रकरणों में टाइमलाइन तय की गई और इसके मुताबिक कार्य हुआ। जिन राजस्व न्यायालयों में अधिक प्रकरण लंबित थे। उनके कारगर निपटारे के लिए विशेष रूप से रणनीति बनाई गई।

हर डेस्क की फाइलें जांची गई

नोडल अधिकारियों की मानिटरिंग का कार्य काफी बारीक था। इसमें गाइडलाइन तैयार की गई थी जिसे सूक्ष्मता से परीक्षण कर तैयार किया गया था। इसके अंतर्गत हर डेस्क के कार्य जांचे गये। राजस्व प्रकरणों में जिस तरह से फाइलों का मूवमेंट होता है उसे टेबल दर टेबल देखा गया। यह देखा गया कि किसी कर्मचारी-अधिकारी के पास फाइल अधिक समय तक रूक तो नहीं रही है। इस प्रकार बारीक मानिटरिंग से लक्ष्य प्राप्त किया जा सका।

लगभग तीन हजार मामले विवादित नामांतरण के तीन महीनों में हल किये गये- संयुक्त कलेक्टर प्रियंका वर्मा ने बताया कि इन तीन महीनों में अविवादित नामांतरण के दस हजार मामले निराकृत किये गये। विवादित नामांतरण के 3 हजार मामले निराकृत किये गये। इसी तरह विवादित बंटवारे के 538 मामले निराकृत किये गये। डायवर्सन के 1755 मामले इन तीन महीनों में निराकृत किये गये।

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