Homeधर्म-समाजअकल्पनीय प्रेम: मालिक की मौत पर दूर गांव से मुक्तिधाम पहुंच गया...

अकल्पनीय प्रेम: मालिक की मौत पर दूर गांव से मुक्तिधाम पहुंच गया बछड़ा,ग्रामीणों के साथ निभाई अंतिम संस्कार की रस्म

बेजुबान पशु,प्रेम को शब्दों में तो बयां नहीं कर पाता,लेकिन मन से हर चीज को महसूस करता है और उसे अपने शारीरिक क्रिया के माध्यम से प्रति उत्तर देता है। पशुओं और मनुष्य के बीच प्रेम के ऐसे कई किस्से आपने सुने होंगे,मालिक और पशु के बीच जो प्रेम अटूट व अकल्पनीय प्रेम का संबंध रहा है, उसे आपने शायद ही कहीं देखा होगा।

पशु मालिक की मृत्यु के बाद बेजुबान बछड़े का वायरल वीडियो देखकर आपके भी नम जाएंगी और यह कहने से भी नहीं चूकेंगे कि यह कोई आम वाक्या नहीं है, ये तो अद्भूत और अकल्पनीय है तो चलिए आपको बताते हैं एक बछड़ा अपने मालिक की मृत्यु पर इंसान की तरह अंतिम संस्कार में शामिल होता और अंतिम संस्कार रस्म की प्रक्रिया में मनुष्यों की तरह चिता में रखे शव की परिक्रमा करता है।

यह वाक्या है झारखंड के हजारीबाग अंतर्गत चौंपारण प्रखंड के चैथी गांव की। जहां शनिवार 10 सितंबर को 80 वर्षीय मेवालाल ठाकुर की मौत हो गई। चूंकि ठाकुर के अपनी कोई संतान नहीं थी। इसलिए उनके परिजन और ग्रामीणों ने अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया।हिन्दू रीति रिवाज के अनुसार जब उनका पार्थिव शरीर अंतिम यात्रा पर मुक्तिधाम के लिए पर निकली तो एक बछड़ा भी रंभाते हुए ग्रामीणों के पास पहुंच गया और लोगों के साथ पीछे पीछे चलने लगा तो ग्रामीणों ने उसे भगाने का खूब प्रयास किया, लेकिन बछड़ा लौटने का नाम ही नहीं लिया। उनके पीछे-पीछे चलते रहा। लोग उसे भगाने में लगे रहे, तब बुजुर्गों ने बछड़े को भगाने से मना किया और पीछे – पीछे चलने देने कहा। बछड़ा लोगों के साथ मुक्तिधाम तक चला आया।

पंच तत्व में विलीन नहीं हो गया, तब तक खड़ा बछड़ा

इसके बाद जैसे ही शव को जमीन पर नीचे रखा गया,तो बछड़ा दौड़ कर शव के पास पहुंचा और मृतक मेवालाल के माथे और पैर को चूमने लगा। वहीं जोर-जोर से करूण स्वर में रंभाने(विलाप) लगा। इस दौरान उनके आंखाें से आंसू भी बह रहा था।शव को चूमता हुआ देख फिर से उन्हें शव के पास से भगाने का प्रयास किया तो वह क्रोधित हो गया और सामने वाले को तरेरने लगा। इसके बाद लोग दूर हट गए। बछड़ा शव के समीप ही खड़ा रहा। इससे भी बड़ी हैरानी तब हुई जब बछड़ा लोगों के साथ चिता पर रखी शव का ग्रामीणों और परिजनों के साथ परिक्रमा किया। जब तक मेवालाल ठाकुर का पार्थिव शरीर पंच तत्व में विलीन नहीं हो गया। तब तक बह, वहीं पर खड़ा रहा।

​मेवालाल के नहीं थी कोई संतान

ग्रामीणों का कहना है कि मेवालाल का अपनी कोई संतान नहीं थी। उनके पास एक गाय थी। जिसकी वह खूब सेवा जतन करता था। गाय ने कुछ महीने पहले ही एक बछड़े को जन्म दिया था। वह उनकी भी खूब सेवा करते थे, लेकिन आर्थिक तंगी की वजह से करीब तीन माह पहले उन्होंने उसे दूसरे गांव के एक किसान को बेच दिया था।इस बीच शनिवार को जब मेवालाल ठाकुर की मौत हो गई, तो वह बछड़ा भी अचानक गांव आ पहुंचा उसकी आंखों से आंसू निकल रहे थे। शव यात्रा में अचानक बछड़े को देखकर कुछ लोगों ने उसे भगाने की भी कोशिश की, लेकिन वह भागा नहीं।

घटनाक्रम का वायरल वीडियो देखकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल उठा रहा है कि पुराने मालिक की मौत की सूचना बछड़े को कैसे मिल गया है,अंत्येष्टि में भाग लेने के लिए वह कैसे लौट आया, जैसे कई तरह के सवाल उठा रहे हैं। तो कुछ लोग तो बछड़े को ही उनका पुत्र के समान बताते हुए ट्वीट कर रहे हैं।

यह भी पढ़ें: दर्दनाक हादसा:प्रतिमा विसर्जन के जा रहे गाड़ी को कार ने मारी ठोकर,दो की मौके पर मौत

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष साव की कार्यकारिणी में दुर्ग से कोई नहीं,कद्दावर नेता के समर्थकों को भी नहीं मिली जगह

विशेषज्ञों ने बच्चों में छिपी हुई प्रतिभा को निखारने के लिए पालकों को बताई उच्चारण कला की थैरेपी

RELATED ARTICLES

Most Popular

error: Content is protected !!