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शतरंज ओलंपियाड में भिलाई के अलंकार निभाएंगे निर्णायक भूमिका,मशाल छत्तीसगढ़ पहुंचने पर किया भव्य स्वागत

देश के 75 शहरों से गुजरने वाली मशाल का 61वां पड़ाव था रायपुर, राज्य की शतरंज खिलाड़ी सुश्री किरण अग्रवाल लेकर जाएंगी हैदराबाद

रायपुर.पहली बार में भारत में आयोजित हो रहे 44वें शतरंज ओलंपियाड की मशाल छत्तीसगढ़ पहुंचने पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, अनेक खेल संघों, खिलाड़ियों, स्कूली बच्चों और जनप्रतिनिधियों ने जोरदार स्वागत किया। माना हवाई अड्‌डे पर खेल एवं युवा कल्याण मंत्री उमेश पटेल ने मशाल रिले और चेस संघ के अधिकारियाें का स्वागत किया। वहां से मशाल को पं. दीन दयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम लाया गया है। मशाल रिले के दौरान शहर की सड़कों पर गजब का उत्साह देखा गया। इसके बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मशाल लेकर आए ग्रेंड मास्टर प्रवीण थिप्से के साथ चेस बोर्ड पर कुछ चालें चलीं।

फूल बरसाकर किया स्वागत

अर्जुन अवार्डी ग्रेंड मास्टर प्रवीण थिप्से ने ओलंपियाड की मशाल थाम रखी थी। छत्तीसगढ़ के अधिकारियों ने राजकीय गमछा ओढ़ाकर उनका स्वागत किया। उसके बाद मशाल को एक विंटेज कार में रखकर रैली निकाली गई। मोटरसाइकिल सवारों का दस्ता तिरंगा उठाए मशाल के साथ-साथ चला। तेलीबांधा तालाब के पास स्कूली बच्चों ने मशाल रिले पर फूल बरसाए। नगर घड़ी चौक पर छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के पदाधिकारियों ने मशाल रिले का स्वागत किया।

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जयस्तंभ चौक पर कुछ देर के लिए रैली को रोका गया। यहां आम लोगों ने मशाल के साथ फोटो खिंचवाए। जीई रोड पर बढ़ते हुए मशाल रैली साइंस कॉलेज परिसर स्थित पं. दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम पहुंची। यहां स्वागत समारोह का आयोजन किया गया है। इस समारोह में ग्रेंड मास्टर प्रवीण थिप्से ने इस मशाल को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को सौंपा। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने यह मशाल राज्य की शतरंज खिलाड़ी वूमन फीडे मास्टर (Woman FIDE Master) किरण अग्रवाल को सौंपा।

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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मशाल लेकर आए ग्रेंड मास्टर प्रवीण थिप्से के साथ मुख्यमंत्री बघेल ने चेस बोर्ड पर कुछ चालें चलीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि इस बार चेस ओलंपियाड की मेजबानी हमारा देश कर रहा है। मैं तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन को विशेष तौर पर बधाई देता हूं कि उन्होंने इस गौरवपूर्ण आयोजन की मेजबानी के लिए अपने राज्य की ओर से 75 करोड़ रुपए की गारंटी और विश्व स्तरीय अधोसंरचना उपलब्ध कराई है। तमिलनाडु का महाबलीपुरम 188 देशों के दो हजार से अधिक खिलाडियों के दांव-पेंच तथा शह-मात के दिमागी कौशल का गवाह बनेगा। उन्होंने कहा कि, प्रदेश के अलग-अलग स्कूलों से चुने गए छह खिलाड़ी भी ओलंपियाड में शामिल होंगे और बड़े-बड़े खिलाड़ियों को देखकर सीखेंगे।

बालोद ‘चेस इन स्कूल’ पायलेट प्रोजेक्ट 

श्री बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में अखिल भारतीय शतरंज महासंघ की पहल पर 22 स्कूलों में शतरंज को बढ़ावा देने का काम शुरू किया गया है। बालोद जिला ‘चेस इन स्कूल’ पायलेट प्रोजेक्ट शुरू करने वाला देश का पहला जिला बन गया है। दंतेवाड़ा के आस्था स्कूल में भी शतरंज का प्रशिक्षण प्रारंभ किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सभी स्कूलों में शतरंज खेलने की व्यवस्था हो ताकि बच्चों को बौद्धिक अभ्यास में मदद मिले।

भिलाई के अलंकार भिवगड़े निभाएंगे निर्णायक की भूमिका

सुश्री अग्रवाल राज्य चेस एसोशिएशन के महासचिव विनोद राठी के साथ इसे लेकर हैदराबाद जाएंगी। बता दें कि, किरण  1986 से 1990 के बीच दो बार ओलंपियाड में भाग लिया था। इस गौरव को फिर से दोहराने की जरूरत है। तमिलनाडु में आयोजित ओलंपियाड में हमारे छत्तीसगढ़ की भी भागीदारी हो रही है। भिलाई के अलंकार भिवगड़े वहां निर्णायक की भूमिका निभाएंगे। किरण अग्रवाल, विनोद राठी और एम.के. चन्द्रशेखर वहां आयोजन समिति का हिस्सा हैं।

रायपुर के साइंस कॉलेज ऑडिटोरियम के कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री

61वें पड़ाव के रूप में पहुंचा था रायपुर

भारत की आजादी के इस साल 75 वर्ष पूरे होने के मौके पर शतरंज ओलंपियाड की मशाल देश के 75 शहरों से होकर गुजर रही है जिसके 61वें पड़ाव के रूप में आज यह रायपुर पहुंचा है। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष और विधायक कुलदीप जुनेजा, महापौर एजाज ढेबर तथा छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के महासचिव गुरूचरण सिंह होरा भी स्वागत कार्यक्रम में शामिल हुए।

महाबलीपुरम में होगा चेस ओलंपियाड

चेस ओलंपियाड को वैश्विक भागीदारी के मामले में ओलंपिक खेलों के बाद सबसे बड़ा खेल आयोजन माना जाता है। इसमें दुनिया भर के 188 देश भाग लेने वाले हैं। चेस ओलंपियाड का आयोजन 28 जुलाई से 10 अगस्त के बीच तमिलनाडु के ऐतिहासिक शहर महाबलीपुरम में हो रहा है।

मास्को में तय हुआ था प्रतिस्पर्धा

यह प्रतियोगिता पहले रूस की राजधानी मास्को में होने वाली थी। रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से आयोजन पर संकट आ गया। उसके बाद भारतीय ओलंपिक संघ ने मेजबानी चाही और भारत को यह मेजबानी मिल गई। चेस ओलंपियाड के 95 साल के इतिहास में यह पहला मौका है जब भारत इसकी मेजबानी कर रहा है।

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