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बड़ी कार्रवाई: राज्य सूचना आयुक्त ने जानकारी नहीं देने वाले चार जन सूचना अधिकारी पर लगाया जुर्माना

रायपुर. छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग के राज्य सूचना आयुक्त मनोज त्रिवेदी ने समय पर जानकारी उपलब्ध नहीं कराने वाले चार जनसूचना अधिकारी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की।राज्य सूचना आयुक्त ने जन सूचना अधिकारियों पर
25-25 हजार का अर्थदंड अधिरोपित किया है। साथ ही जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी(CEO)को अर्थदंड की राशि जन सूचना अधिकारी के वेतन से वसूली कर शासकीय कोष में जमा कराने के निर्देश दिए हैं और राज्य सूचना आयोग को अवगत कराने कहा है।

मामला ग्राम पंचायत बेंदरकोना का

सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत  के. एस. क्षत्री नगर पालिक निगम कॉलोनी कोरबा ने कोरबा जनपद पंचायत जन सूचना अधिकारी व मुख्य कार्यपालन अधिकारी  डॉ.आराध्या कमार से 1 सितंबर 2016 को आवेदन देकर ग्राम पंचायत बेंदरकोना जनपद पंचायत कोरबा को शासकीय योजनान्तर्गत जनवरी 2015 से 15 अगस्त 2016 तक आबंटित राशि एवं कार्यो की सूची की मांग किया था। जानकारी समय में प्राप्त नहीं होने पर प्रथम अपील किया किन्तु प्रथम अपीलीय अधिकारी के निर्णय नहीं दिए जाने से आयोग में द्वितीय अपील किया।

नोटिस का नहीं दिया जवाब

राज्य सूचना आयुक्त त्रिवेदी ने आयोग में सुनवाई के लिए जनसूचना अधिकारी को 2-3 बार नोटिस दिया। बावजूद इसके जन सूचना अधिकारी डॉ.आराध्या कमार ने आयोग के समक्ष को कोई जवाब नहीं प्रस्तुत किया। आयोग की तरफ से जिला पंचायत कोरबा और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग छ.ग. शासन के माध्यम से जनसूचना अधिकारी को निर्देशित किया गया कि आवेदक को चाही गई जानकारी निःशुल्क पंजीकृत डाक से प्रदाय कर पावती आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने कहा। कोई जवाब नहीं देने के कारण सूचना आयुक्त त्रिवेदी ने डॉ कमार 25 हजार का अर्थदण्ड अधिरोपित किया। मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत कोरबा को निर्देशित किया गया कि अधिरोपित अर्थदण्ड की राशि की वसूली कर शासकीय कोष में जमा कराएं और आयोग को सूचित करें।

लोगों को भुगतान की जानकारी देने से बच रहा है वन विभाग

अंबिकापुर जिले के केदारपुर निवासी रामकुमार ठाकुर ने सरगुजा वृत अंबिकापुर के वन संरक्षक और जनसूचना अधिकारी से जाधव श्रीकृष्ण के खिलाफ 25 हजार जुर्माना लगाया। जन सूचना अधिकारी जाधव ने आवेदनकर्ता को जानकारी से वंचित रखा। इसलिए उनके खिलाफ जुर्माने की कार्रवाई की गई। आवेदक रामेश्वर ठाकुर टी पी नगर कोरबा ने जनसूचना अधिकारी ग्राम पंचायत मुढुनारा जनपद पंचायत कोरबा को 28 नवंबर 2017 का आवेदन कर 1फरवरी 2015 से 30 नवंबर 2017 पंचायत में पारित प्रस्ताव बैंक से राशि आहरण कर हितग्राहियों का नाम, पता जिसे भुगतान किया गया उसकी रसीद या चेकबुक की छायाप्रति की मांग किया था, लेकिन जन सूचना अधिकारी ने आयोग के समक्ष भी जवाब प्रस्तुत नहीं किया। तत्कालीन जनसूचना अधिकारी पर अधिनियम की धारा 20 (1) के तहत अर्थदण्ड अधिरोपित किया गया।

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कबीरधाम निवासी विवेक चौबे ने ग्राम पंचायत शीतलपानी के जनसूचना अधिकारी को 25 नवंबर 2016 का आवेदन कर एक जनवरी 2014 से 30 अक्टूबर 2016 तक पंचायत के आय-व्यय की रोकड़ बही की छायाप्रति की मांग की थी, लेकिन तत्कालीन जनसूचना अधिकारी लखन लाल मरावी ने जवाब नहीं दिया। आयोग ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा, जन सूचना अधिकारी ने जवाब ही नहीं प्रस्तुत किया। सूचना आयुक्त मनोज त्रिवेदी ने कबीरधाम जिले के सीईओ को जन सूचना अधिकारी के वेतन से 25 हजार जुर्माना की राशि वसूली कर शासकीय कोष में जमा कराने के निर्देश दिए हैं।

जानकारी देने से मना करें तो दर्ज करवाएं अपनी शिकायत 

लोकतंत्र में पारदर्शी शासन व्यवस्था की यह जवाबदेही होती हैं, कि उनके सभी नागरिकों को शासन व्यवस्था की सम्पूर्ण गतिविधियों की सूचना प्राप्त करने का मौलिक अधिकार हो। सूचना का अधिकार का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक जागरूक नागरिक को उनकी इच्छित सूचनाएँ आसानी से उपलब्ध करवाना है। यदि कोई विभाग अथवा संस्था जानकारी देने से इनकार करता हैं, तो उनके विरुद्ध सूचना आयोग में शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है। इस अधिनियम की मदद से सभी नागरिकां को सूचना सम्पन्न बनाना, सरकार की कार्यप्रणाली को पारदर्शी और अधिक उतरदायी शासन व्यवस्था की ओर ले जाना हैं। सूचना किसी भी रूप में हो सकता है, प्रिंट मीडिया, मॉस मीडिया, वेब मीडिया ईमेल, जनमत, रिपोर्ट, कागज, संवाद, रिपोर्ट और आकड़े, एडवर्टाइजिंग के रूप में हो सकता है।

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