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अमरूद,सीताफल, ड्रेगनफ्रूट के उत्पादन में छत्तीसगढ़ अग्रणी,लाभ के लिए उत्पादकों का संगठन जरूरी

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में पांच दिवसीय एग्री कार्निवाल 2022 शुरू
छत्तीसगढ़ से कृषि निर्यात की संभावनाओं को लेकर दिए कई सुझाव
पहले दिन क्रेता-विक्रेता सम्मेलन में देश-विदेश से आए कृषि निर्यातकों ने संगठन बनाने पर दिया जाेर

रायपुर. इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) में कृषि एवं उद्यानिकी उत्पादों के निर्यात के लिए एपीडा (APEDA) के सहयोग से आयोजित पांच दिवसीय एग्री कार्निवाल2022(AGRI CARNIWAL2022) का शुक्रवार को कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल (Vice Chancellor Dr. Girish Chandel)ने शुभारंभ किया। कुलपति ने क्रेता-विक्रेता सम्मेलन में देश विदेश से आए कृषि निर्यातकों ने छत्तीसगढ़ के प्रगतिशील किसान एवं कृषि आधारित उद्योग संचालित करने वाले कारोबारियों को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में अमरूद सीताफल, ड्रेगनफ्रूट के उत्पादन में अग्रणी है, जहां से विभिन्न उद्यानिकी उत्पाद बड़े-बड़े शहरों तक भेजे जाते हैं। जिसे उत्पादक संगठन बनाकर अच्छा व्यवसाय किया जा सकता है। इससे उत्पादकों को अच्छा लाभ होगा।

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तकनीकी सत्र में निर्यात की संभावनाओं की चर्चा करते हुए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के संचालक विस्तार सेवाएं डॉ. अजय वर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय के तहत संचालित 27 कृषि विज्ञान केन्द्रों केे माध्यम से बाजार लिंकेज प्राप्त किया जा सकता है। नितिन गुप्ता ने कहा कि हरियाणा में दस हजार किसानों के साथ बासमती चावल की किस्में 1509 और 1121 को उगाया है। उन्होंने बताया कि एक किलो चावल उगाने में 4000 लीटर पानी लगता है, जिसमें ड्रिप तकनीक से 250 से 300 लीटर पानी की बचत की जा सकती है।

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पाटन में इन्टीग्रेटेड पैक हाऊस

इस सत्र में अपर संचालक उद्यानिकी भूपेन्द्र पाण्डेय ने कहा कि शिमला मिर्च, काजू और केला, सीताफल की खेती व्यापक क्षेत्र में की जाती है, जिसे कृषक उत्पादक संगठन बनाकर नया स्वरूप दे सकते हैं।वहीं उप संचालक उद्यानिकी नीरज शुक्ला ने कहा कि 50 करोड़ रूपये की लागत से पाटन में इन्टीग्रेटेड पैक हाऊस बनाए जाने की जानकारी दी।  प्रगति गोखले ने मार्केट मिर्ची एप के माध्यम से फल, फूल, हर्बल, दलहन एवं अनाज का निःशुल्क व्यापार के बारे में बताया। प्रगतिशील कृषक श्याम बघेल ने एफपीओ गठन की सरल प्रक्रिया पर जोर दिया।सम्मेलन में विशिष्ट अतिथि के रूप में एपीडा के अध्यक्ष डॉ. एम. अनंगमुथु, संचालक कृषि डॉ. अय्याज एफ. तंबोली, विश्वविद्यालय प्रबंध मण्डल सदस्या वल्लरी चन्द्राकर, नितिन गुप्ता, हितेश वरू, प्रमोद अग्रवाल उपस्थित थे।

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