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जशपुर रियासत के “छोटू बाबा” नहीं रहे, तमाश काशिशों के बावजूद चिकित्सकों ने नहीं बचा सके उनकी जान

रायपुर @ news-36.com जशपुर रियासत के छोटू बाबा और छत्तीसगढ़ भाजपा के युवा नेता व पूर्व विधायक युद्धवीर जुदेम हमारे बीच नहीं रहे। छत्तीसगढ़ BJP के फायर ब्रांड नेता और स्व. दिलीप सिंह जूदेव के छोटे बेटे युद्धवीर सिंह जुदेव ने आज बंगलुरू के अस्पताल में अंतिम सांस ली। वह पिछले कई दिनों से लीवर की समस्या से जूझ रहे थे। उन्हें पहले दिल्ली और फिर बेंगलुरु के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। यहां उनका लीवर ट्रांसप्लांट होना था, लेकिन इससे पहले ही उनकी स्थिति बिगड़ गई। उन्हें डॉक्टरों ने वेंटिलेटर पर रखा, पर तमाम कोशिशों के बावजूद जान नहीं बचा सके।

रियासत के ‘छोटू बाबा’ यानी युद्धवीर सिंह जूदेव के चाहने वाले युवाओं की एक बड़ी संख्या है। अपने बेबाक बोल के चलते युद्धवीर विपक्ष में रहते हुए भी वह हमेशा चर्चित रहे। हर बात दमदारी से उठाई। फिर चाहे भ्रष्टाचार ही क्यों न हो। इसके चलते वह युवाओं में बहुत जल्द ही लोकप्रिय हो गए। कठिन चुनौतियों के बाद भी उन्होंने अपनी विशेष पहचान बनाई थी

अपने पिता के नक्शे कदम पर चले युद्धवीर
युद्धवीर सिंह अपने स्व.पिता दिलीप सिंह जूदेव के नक्शे कदम पर चलते रहे। उनकी इसी काबिलियत ने उन्हें कम समय में ही राजनीतिक जीवन में पहचान दे दी। जिला पंचायत अध्यक्ष पद से उनका सफर शुरू हुआ, फिर उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। इसके बाद वे चंद्रपुर से 2 बार विधायक चुने गए। पहली बार 2008 में और फिर 2013 में दोबारा विधायक निर्वाचित हुए। वह संसदीय सचिव और दूसरे काल में बेवरेज कॉरपोरेशन के अध्यक्ष भी बनाए गए।


युद्धवीर सिंह बीमार होने के बाद भी अंतिम समय तक लोगों के लिए संघर्ष करते रहे। भ्रष्टाचार सहित कई मुद्दों को लेकर मीडिया और सोशल मीडिया के जरिए आवाज उठाते रहे। जीवन के आखिरी पड़ाव में उन्होंने बहुजन हिंदू परिषद की कमान संभाली और हिंदुत्व के लिए बोलते रहे। वहीं भ्रष्टाचार और शासन-प्रशासन की अनियमितताओं को लेकर, राज्य की ज्वलन्त समस्याओं पर आवाज बुलंद की।

राजनीतिक विरासत अब प्रबल और संयोगिता के पास

अविभाजित मध्यप्रदेश के बड़े भाजपा नेता स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव की राजनीतिक विरासत अब उनके दूसरे बेटे प्रबल प्रताप सिंह और छोटे बेटे स्वर्गीय युद्धवीर सिंह की पत्नी संयोगिता सिंह के पास चली गई है। दिलीप सिंह जूदेव के तीन पुत्र थे। इनमें से सबसे बड़े पुत्र शत्रुंजय सिंह का निधन 2012 में हार्ट फेल होने से हो गया। इसके बाद प्रबल प्रताप और युद्धवीर भाजपा की राजनीति में सक्रिय रहे। युद्धवीर सिंह की पत्नी संयोगिता सिंह भी भाजपा में सक्रिय रहीं और उन्हें पिछले विधानसभा चुनाव में चंद्रपुर विधानसभा सीट से टिकिट भी मिला। वे चुनाव हार गईं, लेकिन कार्य समिति की सदस्य के रूप में कार्य करती रहीं। प्रबल प्रताप भी जशपुर की पंचायत राजनीति में सक्रिय रहे और उपाध्यक्ष रहे। वे भी अभी भाजपा में संगठन मंत्री हैं। वे जशपुर में ही रहते हैं, जबकि संयोगिता जशपुर और रायपुर दोनों स्थानों पर सक्रिय हैं।

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