HomeUncategorizedछग सरकार की इलेक्ट्रिक वाहन नीति: राज्य में दो पहिया, तिपहिया, चार...

छग सरकार की इलेक्ट्रिक वाहन नीति: राज्य में दो पहिया, तिपहिया, चार पहिया इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीदी पर 100% SGST की प्रतिपूर्ति

पर्यावरण और जनहित में छत्तीसगढ़ सरकार का बड़ा फैसला

रायपुर. छत्तीसगढ़ सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहन नीति लागू कर पर्यावरण और जनहित में बड़ा निर्णय लिया है। जनहित इसलिए कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के मंत्रिमंडल ने इलेक्ट्रिक वाहन नीति के तहत राज्य में दो पहिया, तिपहिया, चार पहिया, माल वाहक, यात्री वाहन एवं अन्य श्रेणी के इलेक्ट्रिक वाहनों की मेनूफैक्चरिंग से लेकर कन्ज्यूमर को रोड टैक्स, SGST, बैटरी स्वैपिंग, उपकरणों की खरीदी समेत विभिन्न छूट एवं सुविधाएं देने का निर्णय लिया है।

जिसमें राज्य में बेची और पंजीकृत इलेक्ट्रिक बसों और इलेक्ट्रिक माल गाड़ियों की बिक्री पर 100% SGST और पंजीकरण शुल्क की प्रतिपूर्ति सबसे बड़ी छूट है। यानी गाडि़याें की  बिक्री पर 100% SGST और पंजीकरण शुल्क का वहन राज्य सरकार करेंगी। या फिर आप इसे ऐसे समझ सकते हैं,जैसे कि गवर्नमेंट का जो जीएसटी के रूप में व्यय होगा। उसे  राज्य सरकार वहन करेगा, जो कि इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदने वालों के लिए एक बड़ी बचत होगी। इसके अलावा वाहन खरीदने वालों को रोड टैक्स में भी छूट मिलेगी।

दो साल पहले खरीद चुके लोगों को भी मिलेगी छूट का लाभ

राज्य सरकार की इलेक्ट्रिक वाहन नीति के अनुसार प्रदेश में नियम लागू होने की तारीख से पहले खरीदे गए सभी इलेक्ट्रिक वाहनों पर 100 फीसद रोड टैक्स में छूट मिलेगी। इसके बाद अगले 2 साल के दौरान यह छूट 50% और उसके बाद एक साल के दौरान 25% होगी। यह नीति 2027 तक चलनी है। बैटरी के साथ बेचे और पंजीकृत वाहन 100% मूल प्रोत्साहन के पात्र होंगे। बिना बैटरी के बेचे गए वाहनों के लिए मूल मांग प्रोत्साहन राशि का 50% वाहन निर्माता द्वारा प्राप्त किया जाएगा, जिसे वह अंतिम ग्राहक को हस्तांतरित करना अनिवार्य होगा।

नीति से मेनूफैक्चरर और विक्रेताओं को भी लाभ

सरकार ने आने वाले पांच साल यानी 2027 तक ईवी निर्माण की सोच रखने वाले उद्यमों को प्रोत्साहित करने लिए 500 एकड़ में ईवी पार्क बनाने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने ईवी निर्माण उद्यम को विकसित करने के लिए प्लांट और मशीनरी की लागत का 25% अनुदान और नए वाहनाें के कुल पंजीयन का केवल 15 वाहनों से ही इलेक्ट्रिक कर लेने का निर्णय लिया है। यानी मेनुफैक्चरर को 85 फीसद ईवी गाड़ियों का इलेक्ट्रिक टैक्स देना ही नहीं पड़ेगा। जो इको-सिस्टम के निर्माताओं को आकर्षित करेगा। प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों के व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।

चार्जिंग स्टेशन के माध्यम से लोगों को रोजगार

चार्जिंग स्टेशन को स्टार्टअप के तहत प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके लिए नेशनल हाइवे, स्टेट हाइवे, मार्केट, बस स्टैंड समेत सार्वजिनक जगहों पर फास्ट चार्जिंग के लिए पब्लिक चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप किया जाएगा। नगरीय निकायों में ओवर ब्रिज के नीचे, सरकारी कार्यालयों में फास्ट चार्जिंग सेंटर बनाया जाएगा। इसके लिए सरकार ने राज्य ईवी विकास निगम का गठन करेगा। ईवी निगम के माध्यम से स्विचिंग/स्वैपिंग स्टेशनों का इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर संचालन के लिए ऑपरेटर्स को सौंपा जाएगा। इसके अलावा रोड जो स्वयं की लागत से इंफ्रास्ट्रक्चर करना चाहता है उसे कम कीमत पर किराए पर जमीन दी जाएंगी। इस तरह से चार्जिंग सेंटर लोगों के लिए राेजगार का नया केन्द्र बनेगा। जो ईवी के व्यापार से जुड़ेंगे उन्हें सरकार की ओर से बिजली की खपत, बैटरी एवं उपकरणों की खरीदी में छूट के रूप में सब्सिडी दी जाएंगी। ऊर्जा ऑपरेटरों को 100% SGST प्रतिपूर्ति किया जाएगा।

भवनाें में चार्जिंग पाइंट

राज्य सरकार ने ईवी नीति के तहत आवासीय और गैर आवासीय भवन मालिकों को चार्जिंग स्टेशन की स्थापना के लिए प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया है। शासन की इस नीति के माध्यम से इच्छुक लोग अनुदान के साथ निजी चार्जिंग पॉइंट तैयार कर सकेते हैं। इसको लगाने में हुए खर्च की प्रतिपूर्ति बिजली बिल के माध्यम से की जाएंगी।

पर्यावरण भी रहेगा संतुलित

बात करें पर्यावरण की,अभी हम गाड़ी चलाने के लिए ईंधन के रूप में पेट्रोल या डीजल का उपयोग करते हैं। जिससे निकलने वाली धुआं पर्यावरण को प्रदूषित कर रहा है,लेकिन जब ईंधन वाली गाड़ी के स्थान पर हम इलेक्ट्रिक गाड़ी चलाएंगे, तो गाड़ी इलेक्ट्रिक ऊर्जा से चलेगी और इलेक्ट्रिक सिस्टम धुआं रहित है। इसलिए इलेक्ट्रिक गाड़ियाें से प्रदूषण नहीं के बराबर होगा।

RELATED ARTICLES

Most Popular

error: Content is protected !!