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विशेषज्ञों ने बच्चों में छिपी हुई प्रतिभा को निखारने के लिए पालकों को बताई उच्चारण कला की थैरेपी

  • समग्र शिक्षा विभाग की पहल
  • विशेष आवश्यकता वाले दिव्यांग बच्चों के पालकों को दिया गया प्रशिक्षण

रायपुर. समग्र शिक्षा विभाग,छत्तीसगढ़ ने विशेष आवश्यकता वाले दिव्यांग बच्चों में छिपी हुई प्रतिभा को निखारने और क्षमता निर्माण की दिशा में समावेशी शिक्षा की पहल की है। ताकि बच्चों में छिपी हुई प्रतिभा को निखारा जा सके और बच्चों में पढ़ने, लिखने एवं बोलने की कला में क्षमता निर्माण किया जा सके।

समग्र शिक्षा विभाग ने समावेशी शिक्षा के तहत के लिए पालकों को जगदलपुर में दो दिवसीय प्रशिक्षण दिया। जहां विशेषज्ञों ने अभिभावक, पालकों और शिक्षकों को दिव्यांग एवं विशेष बच्चों के उचित देखभाल, पढ़ने लिखने और बोलने की कला विकसित करने के लिए पालकों को गृह आधारित तौर-तरीके बताए।

समग्र शिक्षा के प्रबंध संचालक नरेन्द्र दुग्गा ने बताया कि समावेशी शिक्षा के अंतर्गत विशेष बच्चों के साथ पालकों और शिक्षकों को समय-समय पर प्रशिक्षण दिया जाता है। इसी कड़ी में जगदलपुर दो दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया। जहां विशेषज्ञों ने बच्चों में हकलाने या तोतली आवाज को दूर करने के लिए थैरेपी बताई। प्रशिक्षित शिक्षकों ने पालकों के सामने ही बच्चों को थैरेपी देते हुए शब्दों के उच्चारण की कला सिखाई। ब्रेल लिपि, सांकेतिक और दैहिक भाषा के माध्यम से बच्चों के साथ संवाद स्थापित करने की कला दोहराई गई। ताकि पालक सीखें और उससे घर में बच्चे को थैरेपी देकर क्षमता निर्माण कर सके।

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प्रदेश के विभिन्न स्कूलों में 36756 दिव्यांग बच्चे करते हैं पढ़ाई

प्रबंध संचालक श्री दुग्गा ने बताया कि प्रदेश के विभिन्न प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में करीब 63756 दिव्यांग बच्चे  पढ़ाई कर रहे हैं। इन्ही बच्चों में कौशल विकास करने और शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने कि लिए समावेशी शिक्षा के अंतर्गत उनके 1016 पालकों, प्राथमिक स्कूल के 2840 शिक्षक-शिक्षिकाएं, माध्यमिक स्कूल के 2600 शिक्षक-शिक्षिकाएं और  3360 प्राचार्य/ व्याख्याताओं को प्रशिक्षण दिया गया। उन्हें 21 प्रकार के दिव्यांगता के बारे में बताया गया। साथ ही बच्चों के देखभाल कर उनकी कमजोरियों को दूर करने के तौर तरीके सिखाया गया। शैक्षिक, सामाजिक,  माैलिक संरक्षण के अधिकारों की जानकारी दी गई।

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