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Fertilizer crisis: केन्द्र से छत्तीसगढ़ को कम मिला रासायनिक उर्वरक,डीएपी की सप्लाई मात्र 39 प्रतिशत

रायपुर . केन्द्र से छत्तीसगढ़ को एक लाख 9 हजार मेट्रिक टन कम यूरिया मिला है। माह अप्रैल एवं मई में 3.29 लाख टन यूरिया की आपूर्ति के लक्ष्य के विरूद्ध मात्र 2.20 लाख टन यूरिया प्राप्त हुआ है। यानी केन्द्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ को खरीफ 2022 में मांग के विरूद्ध कम मात्रा में रासायनिक खाद की सप्लाई की है। राज्य में एनपीके की उपलब्धता लक्ष्य के विरूद्ध मात्र 30 प्रतिशत, डीएपी(DAP) की उपलब्धता 39 प्रतिशत और पोटाश की उपलब्धता मात्र 35 प्रतिशत है। इसलिए राज्य सरकार ने किसानों से जरूरत अनुसार सहकारी समितियों से उर्रवकों (Fertilizers)का उठाव करने की अपील की है।

1 लाख टन कम यूरिया की सप्लाई
अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार माह अप्रैल एवं मई 2022 में राज्य को यूरिया (Urea)की कुल आपूर्ति 3.29 लाख टन होनी थी, लेकिन केवल 2.20 लाख टन यूरिया ही प्राप्त हुआ। यूरिया के वितरण का संपूर्ण नियंत्रण भारत सरकार के उर्वरक मंत्रालय द्वारा किया जाता है। यूरिया की उपलब्धता खरीफ के लक्ष्य के विरूद्ध 62 प्रतिशत है। इसी प्रकार राज्य में एनपीके की उपलब्धता खरीफ के लक्ष्य के विरूद्ध 30 प्रतिशत, डीएपी की उपलब्धता 39 प्रतिशत, पोटाश की उपलब्धता 35 प्रतिशत है।

13.70 लाख टन उर्वरक की मांग
बता दें कि खरीफ 2022 हेतु छत्तीसगढ़ द्वारा केन्द्र से कुल 13.70 लाख टन उर्वरकों की मांग की गई है, जिसका अनुमोदन भारत सरकार द्वारा दिया गया है। राज्य सरकार द्वारा उर्वरकों की कुल मांग में से यूरिया 6.50 लाख टन, डीएपी 3 लाख टन, पोटाश 80 हजार टन, एनपीके 1.10 लाख टन एवं सुपरफास्फेट 2.30 लाख टन शामिल है।

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आगामी दिनों में हो सकती है उर्वरकों की कमी

आगामी दिनों में समय पर उर्वरक न मिलने से इनकी कमी हो सकती है। राज्य सरकार द्वारा रासायनिक उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।छत्तीसगढ़ शासन द्वारा रासायनिक उर्वरक प्रदायकर्ता फर्टीलाइजर कंपनियों के पदाधिकारियों से लगातार संपर्क एवं समन्वय कर उर्वरकों की राज्य में आपूर्ति सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। उर्वरकों के लिए रेल के माध्यम से प्राप्त होने वाले रैक के लिए आवश्यक समन्वय किया जा रहा है

सहकारी समितियों द्वारा अग्रिम उठाव पर जोर
राज्य सरकार द्वारा किसानों को सहकारी संस्थाओं के माध्यम से अग्रिम उठाव करवाने, पौश मशीन में नियमित एन्ट्री करवाने एवं प्राप्त उर्वरक के तेजी से भंडारण एवं वितरण की व्यवस्था की जा रही है, ताकि राज्य को समय पर उर्वरक प्राप्त करने में समस्या न हो। चूंकि यूरिया के अतिरिक्त अन्य सभी उर्वरकों अधिकांशतः आयातित सामग्री पर आधारित है अतः इनकी व्यवस्था भारत सरकार के माध्यम से ही की जा सकती है। अतः राज्य में पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध कराने का दायित्व केन्द्र सरकार का है।

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