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स्मृति शेष: जनहित के मुद्दे पर सत्ता और संगठन से कभी हार न मानने वाली पूर्व सांसद करुणा शुक्ला, कोरोना वायरस से हार गई जिंदगी की जंग


भिलाई @ News-36. जनहित के मुद्दे पर सत्ता और संगठन से कभी हार न मानने वाली पूर्व सांसद करुणा शुक्ला कोरोना वायरस से जंग हार गई। अब वह हमारे बीच नहीं रहीं, लेकिन छत्तीसगढ़ राज्य के विकास के प्रति उनकी सोच, हमें आगे बढऩे के लिए प्रेरित करती रहेंगी।
विधानसभा चुनाव रिपोर्टिंग के दौरान मेरी उनसे 2018 में राजनांदगांव के हाट बाजार में मुलाकात हुई थी। बातचीत में मैंने उनसे एक सवाल पूछ लिया था कि आपकी राजनीतिक कर्मभूमि तो जांजगीर, कोरबा रही है, लेकिन पार्टी ने आपकी कर्मभूमि से दूर, राजनांदगांव सीट चुनाव मैदान में भेज दिया है। क्या कांग्रेस को यहां से लडऩे के लिए कोई उम्मीद्वार नहीं मिला? जवाब में उन्होंने कहा था कि, मैं छत्तीसगढ़ के स्वप्नदृष्टा पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की भतीजी हूं। मैं उनके सपनों को पूरा करने के लिए यहां आई हूं। उन्होंने अपनी बात को एक लाइन और आगे बढ़ाते हुए कहा था कि, उनके लिए हार-जीत मायने नहीं रखती, लेकिन यह तय है कि इस बार छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार बनेंगी और कांग्रेस की सरकार ही पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी के विकास की परिकल्पना को पूरा करेंगी।
शुक्ला का राजनीतिक सफर
1 अगस्त 1950 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में जन्म लेने वाली पूर्व सांसद करूणा शुक्ल की राजनीतिक कर्मभूमि छत्तीसगढ़ के जांजगीर रही। वह भारतीय जनता पार्टी से जांजगीर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती थीं। भाजपा के साथ उन्होंने 32 साल का लंबा राजनीतिक सफर तय किया। संघ सरकार में मंत्री भी बनीं। वह 2009 के लोकसभा चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कोरबा से छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ.चरण दास महंत से चुनाव हारने के बाद संगठन में सक्रिय हुईं, लेकिन सत्ता और संगठन के बीच उनकी तालमेल नहीं बैठी। पार्टी से उनकी दूरियां बढ़ती चली गईं। 25 अक्टूबर 2013 को उन्होंने भाजपा से यह कहते हुए त्याग पत्र दे दिया कि, पार्टी “कथित रूप से सत्ता की राजनीति के अधीन है “। 27 फरवरी 2014 को उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हो गए। उन्होंने 2018 में राजनांदगांव विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन वह हार गईं। उसे पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने हराया था।
एक नजर में पूर्व सांसद शुक्ला
पति-माधव प्रसाद शुक्ला
बच्चे- बेटा और बेटी
भाजपा ज्वाइन की-1982, महिला मोर्चा की अध्यक्ष रहीं
पहली बार विधायक बनीं- 1993 में अविभाजित मध्यप्रदेश में
सांसद चुनी गईं- 2004 में
छत्तीसगढ़ समाज कल्याण बोर्ड की अध्यक्ष-2020

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