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गोबर से माता लक्ष्मी की प्रतिमाएं तैयार,पंचगव्य अनुसंधान केन्द्र में उपलब्ध हैं पूजा के लिए प्रतिमाएं

कामधेनु विश्विद्यालय में तैयार हो रही है प्रतिमाएं
प्रतिमा और दीए के लिए कामधेनु पंचगव्य अनुसंधान केन्द्र के अधिकारियों से कर सकते हैं संपर्क

दुर्ग.धार्मिक दृष्टिकोण से गोबर(गोमय) में मां लक्ष्मी का प्रतिरूप माना जाता है। इसलिए पूजा में एक साथ तीन देवी- देवता की पूजा की जाती है जो धन, विद्या और शक्ति की परिचायक है। इसे ध्यान में रखते हुए दाऊ श्री वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्विद्यालय में इस बार विशुद्ध गोमय(गोबर) से माता लक्ष्मी जी की प्रतिमा और दीपक(दीये) का निर्माण किया जा रहा है।

इस संबंध में कामधेनु पंचगव्य अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ के एम कोले का कहना है कि कुलपति डॉ. एनपी. दक्षिणकर के मार्गदर्शन में विवि परिसर में गणेश चतुर्थी से पहले विशुद्ध गोबर से प्रतिमाएं बनाने का काम चल रहा है। डॉ  कोले का कहना है कि इसे पहले श्री गणेश जी की प्रतिमाएं बनाई गई। इसके बाद से विशुद्ध गोबर से माता लक्ष्मी और भगवान श्रीगणेश की प्रतिमाएं और दीये बनाने का काम चल रहा है। जिसमें किसी भी प्रकार से रासायनिक रंगों का इस्तेमाल नहीं किया गया है। यह पूर्ण रूप से प्राकृतिक है। इच्छुक व्यक्ति  इस दीपावली विशुद्ध गोमय(गोबर) से बनी माता लक्ष्मी जी, भगवान गणेश और दीये के लिए कामधेनु पंचगव्य अनुसंधान केंद्र के डॉ राकेश मिश्र से संपर्क कर सकते हैं।

संस्थान के डॉ राकेश मिश्र का कहना है कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से गोबर में कीटाणुओं को मारने की क्षमता होती है। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए कुलपति के निर्देशानुसार एक टीम बनाई गई है। जो मूर्ति और दीये बनाने का काम कर रही है।गणेश चतुर्थी में लोगों ने भी इसकी काफी सराहना की है। विवि कैंपस आकर प्रतिमाएं लेकर गए हैं। लोगों की मांग को ध्यान में रखते हुए माता लक्ष्मी जी की प्रतिमा ,गणेश भगवान और ग्वालिन की प्रतिमाएं एवं दीये बनाने का काम चल रहा है। इच्छुक व्यक्ति विवि परिसर आकर प्रतिमाएं प्राप्त कर सकते हैं।

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1 यह पूर्ण रूप से शुद्ध देशी गाय के गोबर से निर्मित है।

2 यह रासायनिक पदार्थो से मुक्त है।

3 यह पर्यावरण हितैषी(Eco friendly) है ।

4 इस मूर्ति का विसर्जन आप अपने घर के ही किसी टब या बाल्टी में रख देने से एक घंटे से भी कम समय मे पूर्ण रूप से घुल जाती है। जिसके बाद आप इस पानी को आप अपने घर से पौधों को सिंचित कर सकते हैं।

5 चूंकि प्रतिमाएं पूर्णतः रासायनिक पदार्थों से मुक्त है। इसलिए पौधों को किसी भी प्रकार से नुकसान नहीं पहुंचती।

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