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G-7 की बैठक में पीएम मोदी ने अमीर देशों को इशारों-इशारों में जमकर सुनाया

जर्मनी में चल रहे बैठक में कार्बन उत्सर्जन से लेकर जलवायु के मुद्दे पर भारत की बात तर्कों के साथ रखी

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने जर्मनी में हुई जी-7 शिखर सम्मेलन (G-7 Shikhar summit) में जलवायु परिवर्तन से लेकर यूक्रेन युद्ध पर दुनिया के 7 सबसे अमीर देशों को इशारों ही इशारों में जमकर सुनाया। पीएम मोदी ने जी-7 शिखर सम्मेलन में ‘बेहतर भविष्य में निवेश: जलवायु, ऊर्जा, स्वास्थ्य’ के मुद्दे पर भारत की बात तर्कों के साथ रखी और अमीर देशों के रुख का कटाक्ष किया। यही नहीं, भारत ने यूक्रेन संकट पर रूस की आलोचना करने वाले जी-7 के बयान से भी किनारा करते हुए इस मुद्दे का समाधान बातचीत से निकालने की अपील की।

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जर्मनी में जी 7 की बैठक के दौरान चर्चा करते हुए पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कार्बन उत्सर्जन से लेकर जलवायु को लेकर भारत के रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि भारत ने तो कई लक्ष्य समय से पहले ही हासिल कर लिए हैं। बैठक में पीएम ने साफ कहा कि यूक्रेन संकट का असर केवल यूरोप पर नहीं बल्कि पूरी दुनिया पर हो रहा है। रूस और यूक्रेन युद्ध के दौरान ऊर्जा की कीमतें आसमान छू रही हैं।

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत का पौराणिक इतिहास इस बात को गलत साबित करता है कि गरीब देश और गरीब लोग पर्यावरण को ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं। भारत में दुनिया की कुल आबादी का 17 प्रतिशत निवास करता है और यहां कार्बन उत्सर्जन महज 5% है। इसके पीछे का कारण हमारी जीवनशैली है। जो प्रकृति के साथ चलना सिखाती है।

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पीएम ने कहा कि पौराणिक समय में भारत ने खूब खुशहाली देखी है। इसके बाद हमने सदियों तक दासता भी झेली। अब आजाद भारत दुनिया की सबसे तेजी से विकास करने वाली अर्थव्यवस्था है। इस पूरे पीरियड में भारत पर्यावरण बचाने की प्रतिबद्धता के साथ चला। पीएम ने कहा कि ये बेहद अहम है कि ऊर्जा पर केवल अमीर देशों का एकाधिकार नहीं हो। उन्होंने कहा कि इसपर गरीब परिवारों का भी उतना ही हक है। पीएम ने कहा कि उनकी सरकार ने LED बल्ब और कूकिंग गैस को लोगों के घर-घर तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि गरीब लोगों तक ऊर्जा का जरिया पहुंचाकर करोड़ों टन कार्बन उत्सर्जन को रोका जा सकता है।

यूक्रेन मुददे पर किया किनारा
भारत ने जी-7 के उस प्रस्ताव से भी दूरी बना ली जिसमें यूक्रेन संकट के लिए रूस को जिम्मेदार ठहराया गया है और उसकी आलोचना की गई है। पीएम मोदी ने कई द्विपक्षीय बैठकों में साफ-साफ कहा कि इस मुद्दे का समाधान केवल बातचीत के जरिए ही निकल सकता है। पीएम मोदी ने कहा कि भारत हमेशा से शांति की वकालत करता रहा है। मौजूदा स्थिति में भी हमने मुद्दे का समाधान बातचीत से निकालने की अपील की है।

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रूस के फंड रोकने में असफल रहे
पीएम मोदी ने बैठकों के दौरान ने साफ कहा कि जी-7 के देश भी रूस के फंड को रोकने में असफल रहे हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा तनावपूर्ण स्थिति केवल यूरोप तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि ऊर्जी और अनाज की बढ़ती कीमतें दुनिया के हर देश को प्रभावित कर रही है। पीएम ने कहा कि भारत ने कई देशों को अनाज की सप्लाई की है।

जी-7 से चीन को भी संदेश
जी-7 समूह और भारत सहित उसके पांच सहयोगी देशों के नेताओं ने सोमवार को कहा कि वे एक नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को बढ़ावा देना चाहते हैं और अन्य देशों की क्षेत्रीय अखंडता एवं संप्रभुता का सम्मान करते हैं। इन नेताओं ने कहा कि वे संयुक्त राष्ट्र चार्टर में निहित सिद्धांतों का सम्मान करते हैं। उन्होंने शांति, मानवाधिकारों और कानून के शासन की रक्षा के लिए अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की।

एक अंतर-सरकारी राजनीतिक समूह जी-7 ने एक संयुक्त बयान में लोकतंत्र के सिद्धांतों और मूल्यों को आगे बढ़ाने के लिए प्रत्येक देश में मौजूद राष्ट्रीय कानूनों और नियमों के महत्व को स्वीकार किया। इसमें कहा गया है, ‘हम, जर्मनी, अर्जेंटीना, कनाडा, फ्रांस, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, सेनेगल, दक्षिण अफ्रीका, ब्रिटेन, अमेरिका और यूरोपीय संघ के नेता हमारे लोकतंत्रों को मजबूत करने और समानता की दिशा में काम करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हैं।’ हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के आक्रामक कदमों के साथ-साथ यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के बीच यह बयान महत्वपूर्ण है।

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