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पंचायत प्रतिनिधियों के वित्तीय अधिकार बढ़ें, टैक्स वसूली के सिस्टम को और बनाएं मजबूत

वित्त आयोग को स्थानीय निकाय से मिले सुझाव

पंचायतों को सशक्त बनाने वित्त आयोग के अध्यक्ष मिंज ने दुर्ग संभाग के स्थानीय पंचायतों के जन प्रतिनिधियों से लिए सुझाव

दुर्ग. छत्तीसगढ़ वित्त आयोग के अध्यक्ष सरजियस मिंज ने सोमवार को जिला पंचायत सभा कक्ष में दुर्ग संभाग के स्थानीय प्रतिनिधियों की बैठक ली। जहां अध्यक्ष ने प्रतिनिधियों से पंचायती राज संस्थाओं की कार्यप्रणाली को और बेहतर बनाने को लेकर चर्चा की। उन्होंने सबसे पहले ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधियों से सुझाव लिये और इसके बाद जनपद पंचायत और जिला पंचायत के प्रतिनिधियों से क्रमश: सुझाव लिये।

 वित्तीय अधिकार का दायरा बढ़ाया जाए

सुझाव में जन प्रतिनिधियों ने कहा कि जनता से होने वाले लगातार संवाद के दौरान जनता की मांगें सामने आती हैं। इन्हें पूरा करने के लिए स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों के वित्तीय अधिकार का दायरा और बढ़ाने की जरूरत है। अपने क्षेत्र के विकास के लिए एक निश्चित राशि भी स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों को दी जानी चाहिए। पंद्रहवें वित्त की राशि का उपयोग पेयजल के इतर कामों के लिए भी होना चाहिए। क्योंकि जलजीवन मिशन के आने के बाद इस क्षेत्र में दिक्कत दूर हुई है। जनपद पंचायत और जिला पंचायत को व्यावसायिक गतिविधि के माध्यम से आय बढ़ाने के लिए कार्य करना चाहिए।

टैक्स वसूली के लिए अलग से चाहिए टीम

स्थानीय निकाय के प्रतिनिधियों ने कहा कि पंचायतों की आय मजबूत करने से इनमें और भी प्रभावी तरीके से काम हो पाएगा, लेकिन ग्राम पंचायत स्तर पर करारोपण और इसकी वसूली प्रभावी रूप से नहीं हो पा रही। सरपंचों को इस संबंध में अधिक अधिकार मिले तो इसकी वसूली प्रभावी रूप से हो पाएगी। गांव में सरपंच-सचिव के पास काफी काम होते हैं यदि करारोपण और वसूली के लिए पृथक से अमला हो तो यह कार्य प्रभावी रूप से हो सकेगा

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बैठक में उपस्थित पंचायतों के जन प्रतिनिधि

जिला पंचायत अध्यक्ष शालिनी रिवेंद्र यादव ने पंचायतों के आय के बिन्दुओं पर विस्तार से सुझाव दिये और सुझावों पर अमल कर पंचायती राज को अधिक मजबूत बनाने पर जोर दिया। इसके लिए जिला पंचायत तक करारोपण के कैडर को मजबूत करना होगा। इसके साथ ही पंचायत अपने यहां कार्यों के लिए विभिन्न विभागों को अनापत्ति प्रमाणपत्र देते हैं। बहुत से काम ऐसे होते हैं जिसमें विभागों को आय अर्जित होती है। इस एनओसी के लिए कुछ राशि पंचायत द्वारा ली जाए और इसका उपयोग गांव में उपयोगी संसाधनों के निर्माण के लिए किया जाए। इसके साथ ही ऐसे क्षेत्रों का भी चुनाव करना चाहिए जहां पर शुल्क लगाकर गांव के लिए उपयोगी कार्य किये जा सकते हैं।

बोर खनन के लिए पंचायत को दें एनओसी जारी करने का अधिकार

मसलन बोर खनन का विषय है। किसी ने बोर खनन कराया तो इसके बदले कुछ शुल्क दें ताकि उस पर पौधरोपण, सोख्ता गड्ढा जैसे कार्य कराए जा सकें ताकि बोर खनन के माध्यम से होने वाली पानी की क्षति को संतुलित किया जा सके। इससे गांव में वाटर हारवेस्टिंग भी कराई जा सकती है।

वहीं आयोग के अध्यक्ष मिंज ने कहा कि वित्त आयोग जमीनी परिस्थितियों पर लगातार नजर रख रहा है और जनप्रतिनिधियों से लगातार चर्चा कर रहा है। बातचीत से उपयोगी फीडबैक मिलते हैं जिन्हें शासन की ओर प्रेषित किया जाएगा।वहीं संभागायुक्त महादेव कांवरे ने कहा कि स्था प्रतिनिधियों से हुई बातचीत में बहुत सी उपयोगी बातें सामने आई हैं। इन उपयोगी सुझावों के क्रियान्वयन से पंचायती राज संस्थाओं के बेहतर संचालन में और मदद मिल पाएगी। बैठक में आयोग के सचिव सतीश पांडे, संयुक्त सचिव जेएस विरदी, जिला पंचायत सीईओ अश्विनी देवांगन सहित संभाग के अन्य जिलों के सीईओ भी मौजूद रहे।

 

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