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मोरबी पुल हादसा: अब तक 141 लोगों ने गंवाई जान,ब्रिज मैनेजमेंट के खिलाफ केस दर्ज

तीनों सेना, NDRF और फायर ब्रिगेड टीमों का रेस्क्यू जारी

ओरेवा ग्रुप ने 15 साल के लिए नगर पालिका प्रशासन से किया है समझौता

गुजरात.मोरबी में रविवार शाम को मच्छु नदी पर बना केबल ब्रिज के टूटने से अब तक 141 लोग जान गंवा चुके हैं। वहीं अभी भी कुल लोग लापता बताए जा रहे है। 70 घायलों का इलाज चल रहा है। अब तक 170 से ज्यादा लोगों को रेस्क्यू किया गया है। लोगों को बचाने के लिए रातभर राहत-बचाव का काम जारी रहा।

ब्रिज मैनेजमेंट कंपनी के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया गया है। आईजीपी रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में इसकी जांच शुरू कर दी गई है। यह ब्रिज पिछले कई महीनों से बंद चल रहा था, जिसे रिपेयर के बाद पांच दिन पहले ही खोला गया था। रविवार शाम को क्षमता से अधि लोगों के पहुंचने से केबल ब्रिज अचानक टूट गया। इस हादसे में अब तक 141 लोगों ने अपनी जान गवा चुके है।लोगों का आरोप है कि एजेंसी ने टिकट से कमाई के चलते अधिक लोगों को ब्रिज पर जाने दिया गया था। इस वजह से हादसा हुआ है।

गुजरात सीओओ के मुताबिक, भारतीय नौसेना के 50 जवान के साथ NDRF के 3 दस्ते, भारतीय वायुसेना के 30 जवानों के साथ बचाव और राहत अभियान किया जा रहा है। इनके अलावा सेना के 2 कॉलम और फायर ब्रिगेड की 7 टीमें राजकोट, जामनगर, दीव और सुरेंद्रनगर से उन्नत उपकरणों के साथ मोरबी में आकर मोर्चा संभाले हुई है। इनके साथ इन लोगों ने रेस्क्यू में सहयोग कर रहे है।

 

गुजरात सरकार ने मोरबी शहर में पुल गिरने की घटना की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। वहीं, ब्रिज मैनेजमेंट कंपनी के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज कर लिया है। राज्य के गृह मंत्री हर्ष संघवी ने सोमवार की सुबह बताया कि इस मामले में आपराधिक केस दर्ज कर लिया गया है। आईजीपी रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में इसकी जांच शुरू कर दी गई है।

6 महीने से बंद था पुल

मरम्मत की वजह से पिछले छह महीनों से यह बंद था। दिवाली के दूसरे दिन 25 अक्टूबर से इसको जनता के लिए फिर से खोला गया। इसकी मरम्मत में करीब 2 करोड़ रुपए का खर्चा आया था। इस पुल की मेंटिनेंस की जिम्मेदारी वर्तमान में ओधवजी पटेल के स्वामित्व वाले ओरेवा ग्रुप के पास है। इस ग्रुप ने मार्च 2022 से मार्च 2037 तक यानी 15 साल के लिए मोरबी नगर पालिका से समझौता किया है।

1980 में बना है यह पुल

इस पुल का निर्माण वर्ष 1880 में पूरा हुआ था। यह पुल 765 फीट लंबा, 1.25 मीटर चौड़ा और 230 मीटर ऊंचा था। यह भारत के सबसे पुराने पुलों में से एक था। इस पुल के निर्माण का सारा सामान ब्रिटेन से आया था। करीब 3.5 लाख रुपए की लागत में तैयार हुई पुल का उद्घाटन मुंबई के गवर्नर रिचर्ड टेम्पल ने किया था।

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