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अविश्वास प्रस्ताव में भाजपा पार्षद के पास से चली गई नपाप अध्यक्ष की कुर्सी

रायपुर. छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के नगर पालिका परिषद (नपाप)में अविश्वास प्रस्ताव को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच चल रही राजनीतिक सरगर्मी सोमवार को सदन में वोटिंग के शांत हो गई। अविश्वास प्रस्ताव पर हुए मतदान में भाजपा के नगर पालिका अध्यक्ष प्रकाश चंद्राकर के खिलाफ मतदान हुई है। अविश्वास प्रस्ताव के समर्थन में 20 पार्षदों ने वोट किए। अध्यक्ष के पक्ष में मात्र तीन वोट पड़े। बाकी के 6 वोट पीठासीन अधिकारी ने तकनीकी आधार पर खारिज कर दिए।

30 वार्ड वाले नगर पालिका परिषद महासमुंद में कांग्रेस के पार्षद ने अविश्वास प्रस्ताव लाए थे। जिस पर आज सदन में मतदान कराया गया। जिसमें पालिका अध्यक्ष चंद्राकर के समर्थन में तीन वोट पड़े। इसमें एक वोट खुद अध्यक्ष का था और अविश्वास प्रस्ताव के समर्थन में 20 पार्षदों ने मतदान किया। भाजपा के एक पार्षद वोट डालने ही नहीं आए। वहीं विधायक विनोद सेवनलाल चंद्राकर कांग्रेस के सभी पार्षदों को एकजुट कर वोट डलवाने में सफल रहे। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मोहन मरकाम ने पीयूष कोसरे और सुबोध हरितवाल को पर्यवेक्षक बनाकर भेजा था। सभी ने मिलकर पार्षदों को एकजुट किया। सभी ने अविश्वास पस्ताव का समर्थन करते हुए चंद्राकर को अध्यक्ष पद की कुर्सी से हटा दिया।

अध्यक्ष पद के लिए होगा फिर से चुनाव

अविश्वास प्रस्ताव पारित हो जाने के बाद अब नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव होना है। अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए जिला निर्वाचन पदाधिकारी राज्य निर्वाचन आयुक्त को सूचित करेगा और अधिसूचना जारी कर चुनाव की तारीख तय करेगा।

दावेदार चुनाव लड़ने के लिए तैयार

फिलहाल कांग्रेस की ओर से इस पद के दो प्रबल दावेदार बताए जा रहे हैं। इसमें पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष और राशि महिलांग और नगर पालिका के उपाध्यक्ष कृष्णा चंद्राकर है। बताया जा रहा है कि पार्टी इन्हीं में से किसी एक पार्षद को नपा अध्यक्ष पद का उम्मीदवार बनाएगी।

ऐसे बिगड़ता गया भाजपा का गणित

2020 में हुए नगर पालिका चुनाव में भाजपा के 16 पार्षद जीतकर सदन में पहुंचे थे। अध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव में बहुमत मिलने पर भाजपा के प्रकाश चंद्राकर पालिका अध्यक्ष चुने गए थे। उपाध्यक्ष की कुर्सी कांग्रेस पार्षद के पास चला गया था।

पिछले दिनों कांग्रेस पार्षदों ने नगर पालिका अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया तो कलेक्टर ने अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान के लिए चार जुलाई की तारीख तय की थी। इस बीच भाजपा के छह पार्षद एक साथ अज्ञातवास पर चले गए थे। दो दिन पहले ही भाजपा के दो पार्षदों ने क्षेत्रीय विधायक विनोद चंद्राकर की मौजूदगी में कांग्रेस प्रवेश कर गए। इसके बाद से ही माना जा रहा था कि कांग्रेस को भाजपा के पार्षदों में आपसी फूट का फायदा मिलेगा।

पार्टी के खिलाफ वोट करने वाले पार्षद निष्कासित

हार के बाद भाजपा जिला अध्यक्ष रूप कुमारी चौधरी ने समन्वय समिति की बैठक बुलाई। बैठक में पार्टी से बगावत करने वाले 8 पार्षदों को पार्टी से निकाल बाहर करने का प्रस्ताव लाया। समिति के सदस्यों ने प्रस्ताव पर अनुशंसा कर प्रदेश संगठन को भेजने का निर्णय लिया है। जिला समिति की अनुशंसा पर प्रदेश अध्यक्ष निर्णय लेंगे।

इनके खिलाफ पार्टी से निष्कासन का प्रस्ताव

पार्षद मीना वर्मा, माधवी सिक्का, मुन्ना देवार, हाफिज कुरैशी, मनीष शर्मा, पवन पटेल, मंगेश टाकसाले और महेंद्र जैन के नाम शामिल हैं।

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