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National Herald: आज सोनिया गांधी दिल्ली और संजय राउत मुंबई स्थित ईडी दफ्तर में पेश होंगी

न्यूज डेस्क. नेशनल हेराल्ड मामले में आज सोनिया गांधी दिल्ली स्थित ईडी दफ्तर में पेश होंगी। इस पूछताछ का विरोध करने के लिए कांग्रेस एक बार फिर सड़क से लेकर संसद तक प्रदर्शन करेगी। बता दें कि कल राहुल गांधी ने ईडी की कार्रवाई का विरोध करते हुए विजय चौक पर धरना दिया था। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया था।

कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि ED बार-बार धमकी दे रही है, कांग्रेस को बदनाम और परेशान करने की कोशिश कर रही है। सोनिया गांधी की तबियत ठीक नहीं है, लेकिन फिर भी परेशान किया जा रहा है।उन्हें लगता है ऐसा करने से कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटेगा, लेकिन हम पीछे नहीं हटने वाले हैं।

क्या है नेशनल हेराल्ड?
देश के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू ने 20 नवंबर 1937 को एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड यानी AJL का गठन किया था। इसका उद्देश्य अलग-अलग भाषाओं में समाचार पत्रों को प्रकाशित करना था। तब AJL के अंतर्गत अंग्रेजी में नेशनल हेराल्ड(National Herald), हिंदी में नवजीवन और उर्दू में कौमी आवाज समाचार पत्र प्रकाशित हुए। भले ही AJL के गठन में पं. जवाहर लाल नेहरू की भूमिका थी, लेकिन इस पर मालिकाना हक कभी भी उनका नहीं रहा। क्योंकि, इस कंपनी को 5000 स्वतंत्रता सेनानी सपोर्ट कर रहे थे और वही इसके शेयर होल्डर भी थे। 90 के दशक में ये अखबार घाटे में आने लगे। साल 2008 तक AJL पर 90 करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज चढ़ गया। तब AJL ने फैसला किया कि अब समाचार पत्रों का प्रकाशन नहीं किया जाएगा। अखबारों का प्रकाशन बंद करने के बाद AJL प्रॉपर्टी बिजनेस में उतरी।

तो विवाद कहां से शुरू हुआ?
2010 में AJL के 1057 शेयरधारक थे। घाटा होने पर इसकी होल्डिंग यंग इंडिया लिमिटेड यानी YIL को ट्रांसफर कर दी गई। यंग इंडिया लिमिटेड की स्थापना उसी वर्ष यानी 2010 में हुई थी। इसमें तत्कालीन कांग्रेस पार्टी के महासचिव राहुल गांधी डायरेक्टर के रूप में शामिल हुए। कंपनी में 76 प्रतिशत हिस्सेदारी राहुल गांधी और उनकी मां सोनिया गांधी के पास रखी गई। शेष 24 फीसदी कांग्रेस नेताओं मोतीलाल वोरा और ऑस्कर फर्नांडीस (दोनों का निधन हो चुका है) के पास थी।

शेयर ट्रांसफर होते ही AJL के शेयर होल्डर्स सामने आ गए। पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण, इलाहाबाद व मद्रास उच्च न्यायालयों के पूर्व मुख्य न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू सहित कई शेयरधारकों ने आरोप लगाया कि जब YIL ने AJL का ‘अधिग्रहण’ किया था तब उन्हें कोई नोटिस नहीं दिया गया था। यही नहीं, शेयर ट्रांसफर करने से पहले शेयर होल्डर्स से सहमति भी नहीं ली गई। बता दें कि शांति भूषण और मार्कंडेय काटजू के पिता के नाम पर AJL में शेयर था।

सुब्रमण्यम स्वामी ने दर्ज कराया था मामला
2012 में भाजपा के नेता और देश के नामी वकील सुब्रमण्यम स्वामी ने नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मोतीलाल वोरा, ऑस्कर फर्नांडीस, पत्रकार सुमन दुबे और टेक्नोक्रेट सैम पित्रोदा के खिलाफ मामला दर्ज कराया। तब केंद्र में कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए की सरकार थी। सुब्रमण्यम स्वामी ने दावा किया कि YIL ने 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति और लाभ हासिल करने के लिए “गलत” तरीके से निष्क्रिय प्रिंट मीडिया आउटलेट की संपत्ति को “अधिग्रहित” किया।

स्वामी ने यह भी आरोप लगाया कि YIL ने 90.25 करोड़ रुपये की वसूली के अधिकार हासिल करने के लिए सिर्फ 50 लाख रुपये का भुगतान किया था, जो AJL पर कांग्रेस पार्टी का बकाया था। यह राशि पहले अखबार शुरू करने के लिए कर्ज के रूप में दी गई थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि AJL को दिया गया कर्ज “अवैध” था, क्योंकि यह पार्टी के फंड से लिया गया था।

1034 करोड़ रुपये के पात्रा चावल भूमि घोटाला में आरोपी हैं राउत
संजय राउत को 27 जून को 1,034 करोड़ रुपये के पात्रा चावल भूमि घोटाला मामले में ईडी द्वारा पहला समन मिला था। वह पात्रा चॉल के संबंध में अपना बयान दर्ज करने के लिए मुंबई में ईडी के सामने पेश हुए थे। वहीं उन्हें फिर दूसरी बार जब समन भेजा गया तो उन्होंने संसद चलने का हवाला दिया था और कुछ वक्त मांगा था जिसके बाद ईडी ने उन्हें 27 जुलाई को पेश होने के लिए कहा।

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