Homeदेशराष्ट्रपति चुनाव की तारीख का ऐलान: बैलेट पेपर से 18 जुलाई को...

राष्ट्रपति चुनाव की तारीख का ऐलान: बैलेट पेपर से 18 जुलाई को होगा मतदान, 21को आएंगे नतीजे

चुनाव आयोग ने भारत के राष्ट्रपति चुनाव की तारीख का ऐलान कर दिया है। मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने प्रेस कान्फ्रेस में चुनाव की तारीख का ऐलान किया। 18 जुलाई को मतदान होगा। मतदान के तीन दिन बाद 21 जुलाई को मतों की गणना की जाएगी। 25 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देश के 16वें राष्ट्रपति को शपथ दिलाएंगे।

चुनाव आयोग के 15 जून को अधिसूचना जारी होगी। 29 जून तक नामांकन जमा होगा। यानी नामांकन के लिए करीब दो हफ्ते का वक्त मिलेगा। नामांकन की प्रक्रिया पूरी होने के अगले दिन नामांकन प्रत्रों की जांच होगी। इसके बाद दो से तीन दिन का वक्त नाम वापसी के लिए मिलेगा। जरूरत होने पर 18 जुलाई के आसपास मतदान होगा।

25 जुलाई को शपथ समारोह

हर पांच साल पर 25 जुलाई को देश को नया राष्ट्रपति मिलता है। ये सिलसिला 1977 से चल रहा है। जब उस वक्त के राष्ट्रपति फकरुद्दीन अली अहमद का कार्यकाल के दौरान फरवरी 1977 में निधन हो गया। राष्ट्रपति के निधन के बाद उप राष्ट्रपति बीडी जत्ती कार्यवाहक राष्ट्रपति बने। नए राष्ट्रपति की चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद नीलम संजीव रेड्डी 25 जुलाई 1977 को राष्ट्रपति बने। इसके बाद से ही हर पांच साल पर 25 जुलाई को राष्ट्रपति चुने जाते हैं।

राज्य सभा, लोकसभा सदस्य और विधायक मतदान करेंगे
राष्ट्रपति का चुनाव में लोकसभा, राज्यसभा के सभी सांसद और सभी राज्यों के विधायक वोट डालते हैं। इन सभी के वोट की अहमियत यानी वैल्यू अलग-अलग होती है। यहां तक कि अलग-अलग राज्य के विधायक के वोट की वैल्यू भी अलग होती है। एक सांसद के वोट की वैल्यू 708 होती है। वहीं, विधायकों के वोट की वैल्यू उस राज्य की आबादी और सीटों की संख्या पर निर्भर होती है।

233 सांसद डाल सकेंगे वोट
राष्ट्रपति चुनाव में लोकसभा, राज्यसभा और राज्यों के विधानसभा के सदस्य वोट डालते हैं। 245 सदस्यों वाली राज्यसभा में से 233 सांसद ही वोट डाल सकते हैं। 12 मनोनीत सांसद इस चुनाव में वोट नहीं डालते हैं। इसके साथ ही लोकसभा के सभी 543 सदस्य वोटिंग में हिस्सा लेंगे। इनमें आजमगढ़, रामपुर और संगरूर में हो रहे उप चुनाव में जीतने वाले सांसद भी शामिल होंगे।

4120 विधायक डालेंगे वोट

इसके अलावा सभी राज्यों के कुल 4 हजार 120 विधायक भी राष्ट्रपति चुनाव के लिए वोट डालेंगे। इस तरह से राष्ट्रपति चुनाव में कुल मतदाताओं की संख्या 4 हजार 896 होगी। हालांकि, इनके वोटों की वैल्यू अलग-अलग होगी। बता दें कि देश की सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश के एक विधायक के वोट की वैल्यू सबसे ज्यादा 208 होती है। वहीं, इसके बाद झारखंड और तमिलनाडु के एक विधायक के वोट की वैल्यू 176 तो महाराष्ट्र के एक विधायक के वोट की वैल्यू 175 होती है।

बिहार के एक विधायक के वोट की वैल्यू 173 होती है। सबसे कम वैल्यू सिक्किम के विधायकों की होती है। यहां के एक विधायक के वोट की वैल्यू सात होती है। इसके बाद नंबर अरुणाचल और मिजोरम के विधायकों का आता है। यहां के एक विधायक के वोट की वैल्यू आठ होती है।

जानिए किस राज्य के विधायक के वोट की वैल्यू कितनी है?

राज्य  सदस्यों की संख्या  एक सदस्य के वोट की वैल्यू  सभी सदस्यों के वोट की वैल्यू

आंध्र प्रदेश  175  159  27825

अरुणाचल प्रदेश 60 08 480

असम 126 116 14616

बिहार 243 173 42039

छत्तीसगढ़ 90 129 11610

गोवा 40 20 800

गुजरात 182 147 26754

हरियाणा 90 112 10080

हिमाचल प्रदेश 68 51 3468

जम्मू कश्मीर 87 72 6264

झारखंड 81 176 14256

कर्नाटक 224 131 29344

केरल 140 152 21280

मध्य प्रदेश 230 131 30130

महाराष्ट्र 288 175 50400

मणिपुर 60 18 1080

मेघालय 60 17 1020

मिजोरम 40 08 320

नगालैंड 60  09 540

ओडिशा 147 149 21903

पंजाब 117 116 13572

राजस्थान 200 129 25800

सिक्किम 32 07 224

तमिलनाडु 234 176 41184

तेलंगाना 119 132 15708

त्रिपुरा 60 26 1560

उत्तराखंड 70 64 4480

उत्तर प्रदेश 403 208 83824

पश्चिम बंगाल 294 151 44394

दिल्ली 70 58 4060

पुडुचेरी 30 16 480

कुल 4120 549495

* जम्मू कश्मीर की विधानसभा अभी भंग है।

सांसदों के वोट की क्या होगी वैल्यू?
राज्यसभा के 245 में से 233 सांसद राष्ट्रपति चुनाव में वोट डालते हैं। लोकसभा में 543 सांसद वोट डालते हैं। राज्यसभा और लोकसभा सदस्यों के एक वोट की कीमत 708 होती है। दोनों सदनों में सदस्यों की संख्या 776 है। इस लिहाज से सांसदों के सभी वोटों की वैल्यू 5,49,408 होती है। अब अगर विधानसभा सदस्यों और सांसदों के वोटों की कुल वैल्यू देखें तो यह 10 लाख 98 हजार 903 हो जाती है। मतलब राष्ट्रपति चुनाव में इतने वैल्यू वाले वोट पड़ेंगे।

एक वोट की कीमत अलग-अलग क्यों होती है?

हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की जनसंख्या अलग-अलग है। इस चुनाव में हर एक वोट की कीमत राज्य की जनसंख्या और वहां की कुल विधानसभा सीटों के हिसाब से तय होती है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि हर वोट सही मायने में जनता की नुमाइंदगी करे।

वोटों की ये वैल्यू मौजूदा या आखिरी जनगणना की जनसंख्या के आधार पर तय नहीं होती है। इसके लिए 1971 की जनसंख्या को आधार बनाया गया है। राष्ट्रपति चुनाव में जनगणना का आधार 2026 के बाद होने वाली जनगणना के बाद बदलेगा। यानी, 2031 की जनगणना के आंकड़े प्रकाशित होने के बाद 1971 की जगह 2031 की जनगणना के आधार पर सांसदों और विधायकों के वोट की वैल्यू तय होगी।

अब बात विधायक और सांसद के वोट का मूल्य की। दोनों के मूल्य तय करने का तरीका अलग-अलग है। विधायक के वोट का मूल्य एक साधारण सूत्र से तय होता है। सबसे पहले उस राज्य की 1971 की जनगणना के मुताबिक जनसंख्या को लेते हैं। इसके बाद उस राज्य के विधायकों की संख्या को सौ से गुणा करते हैं। गुणा करने पर जो संख्या मिलती है उससे कुल जनसंख्या को भाग दे देते हैं। इसका नतीजा जो आता है वही उस राज्य के एक विधायक के वोट का मूल्य होता है।

इसे एक उदाहण से समझ सकते हैं। जैसे 1971 में उत्तर प्रदेश की कुल आबादी 8,38,49,905 थी। राज्य में कुल 403 विधानसभा सीटें हैं। कुल सीटों को 1000 से गुणा करने पर हमें 403000 मिलता है। अब हम 8,38,49,905 को 403000 से भाग देते हैं तो हमें 208.06 जवाब मिलता है। वोट दशमलव में नहीं हो सकता इस तरह उत्तर प्रदेश के एक विधायक के वोट का मूल्य 208 होता है।

अब बात सांसदों के वोट की कीमत की करते हैं। सांसदों के वोट की कीमत निकालने के लिए सभी विधायकों के वोट की कीमत को जोड़ लिया जाता है। जोड़ने पर जो संख्या आती है उसे राज्यसभा और लोकसभा के कुल सांसदों की संख्या से भाग दे देते हैं। वही एक सांसद के वोट की कीमत होती है। जैसे उत्तर प्रदेश के कुल 403 विधायकों के वोट की कुल कीमत 208*403 यानी 83,824 है।

इसी तरह देशभर के सभी विधायकों के वोट की कीमत का जोड़ 549,495 है। राज्यसभा के 233 और लोकसभा के 543 सासंदों का जोड़ 776 है। अब 549495 को 776 से भाग देने पर हमें 708.11 मिलता है। इस पूर्णांक में 708 लिया जाता है। इस तरह एक सांसद के वोट का मूल्य 708 होता है। विधायकों और सांसदों के कुल वोट को मिलाकर ‘इलेक्टोरल कॉलेज’कहा जाता है। यह संख्या 10,98,903 होती है।

पार्टियां इस चुनाव में व्हिप जारी नहीं कर सकती

कोई राजनीतिक पार्टियां इस बार व्हिप जारी नहीं कर सकती। उल्लंघन करने पर चुनाव आयोग कार्रवाई कर सकती है। व्हिप एक तरह आदेश होता है तो पार्टियां अपने सांसदों और विधायकों को जारी करती हैं। सांसद और विधायक इस चुनाव में वरीयता के आधार पर वोट करते हैं। यानी, जो आपका पसंद का उम्मीदवार है उसे पहली वरीयता देनी होती है। यानी, उसके नाम के आगे एक लिखना होता है। दूसरी पसंद वाले उम्मीदवार के नाम के आगे दो नंबर लिखना होता है। सबसे पहले पहली वरीयता वाले वोट गिने जाते हैं। अगर पहली वरीयता में उम्मीदवार को पचास फीसदी से ज्यादा मूल्य के वोट नहीं मिलते तो दूसरी वरीयता के वोटों की गनती होती है।

कौन लड़ सकता है राष्ट्रपति चुनाव?
चुनाव लड़ने वाला भारत का नागरिक होना चाहिए। उसकी उम्र 35 वर्ष से अधिक होनी चाहिए। चुनाव लड़ने वाले में लोकसभा का सदस्य होने की पात्रता होनी चाहिए। इलेक्टोरल कॉलेज

RELATED ARTICLES

Most Popular

error: Content is protected !!