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रिसाली निगम में एल्डरमैन की नियुक्ति और दो पार्षदों के निर्वाचन पर उठे सवाल

भिलाई. नगर पालिक निगम रिसाली में एल्डरमैन (नामांकित पार्षद) की नियुक्ति का मामला एक बार शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग एल्डरमैन की नियुक्ति और दो पार्षदों के निर्वाचन को लेकर तरह तरह के सवाल उठा रहे हैं।

लोगों में इस बात की चर्चा है कि पिछले बार नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने एक शिकायत के बाद रिसाली नगर निगम में नियुक्त एल्डरमैन की नियुक्ति को रद्द कर दिया गया था। वहीं एल्डरमैन की निधि से जो 48 लाख रुपए का टेंडर लगा था, उसे भी निरस्त कर दिया गया था, लेकिन नियम विरुद्ध की गई नियुक्ति से उन्हें जो मानदेय दिया गया है। उसकी रिकवरी हुई या नहीं है,उसे निगम प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए।

संविधान को सर्वोपरि मानने वाले आरटीआई कार्यकर्ता अली हुसैन सिद्दीकी का कहना है कि, नगर पालिक निगम रिसाली में वर्तमान में जो एल्डरमैन की नियुक्ति हुई है। उसमें वैधानिक पेंच है। अली का कहना है कि पिछले बार नगर पालिक निगम रिसाली में निगम के गठन हुए बिना ही एल्डरमैन की नियुक्ति की गई थी।इसलिए नियुक्ति असंवैधानिक था। शिकायत के बाद नियुक्ति आदेश को नगरीय प्रशासन ने निरस्त कर दिया था।

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अली हुसैन सिद्दिकी

शिकायत के बाद उन्हें हटा दिया गया था और उनके एल्डरमैन निधि से 48 लाख रुपए कर विभिन्न विकास कार्यों का जो टेंडर लगा था। उसे भी निरस्त कर दिया गया था, लेकिन 10 माह तक जो उन 8 एल्डरमैन को दिए गए मानदेय लगभग 6 लाख रुपए का रिकवरी किया गया है या नहीं। इस पर लोग सवाल उठा रहे हैं?

ये है मामला

बता दें कि नगरीय प्रशासन ने 2020 में रिसाली निगम में 8 एल्डरमैन की नियुक्ति की गई थी। उनमें से अनूप डे और विलासराव बोरकर, रिसाली निगम में चुनाव लड़कर पार्षद भी बन गए हैं। क्या इनसे निगम प्रशासन शून्य बकाया प्रमाण पत्र (एन.ओ.सी) जारी करने से पहले मानदेय की राशि रिकवरी कर लिया है। अगर बिना रिकवरी के एनओसी जारी कर दिया है तो यह निगम की प्रशासन की बड़ी लापरवाही है।

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वर्तमान में जिन 8 एल्डरमैन की नियुक्ति की गई है। उनमें से संगीता सिंह और तरुण बंजारे पहले एल्डरमैन रह चुके हैं। उन्होंने 10 माह का मानदेय लिया है। जिसकी रिकवरी हुई या नहीं है। इसे भी निगम प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए। अगर रिकवरी नहीं हुई है तो फिर इन्हें एल्डरमैन के पद पर कैसे नियुक्त कर दिया गया?

क्या कहता है निगम अधिनियम

नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की धाराओं में स्पष्ट उल्लेख है कि जो व्यक्ति नगर पालिक निगम का देनदार होगा। वह पार्षद या एल्डरमैन नहीं बन सकता है। इसी नियम के तहत दो पार्षदों के नामांकन से पहले निगम की ओर से जारी की गई एनओसी और बकाएदार व्यक्ति को एल्डरमैन बनाए जाने पर सवाल उठाया जा रहा है।

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