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बौद्ध सम्मेलन में हिन्दू देवी देवताओं को नहीं मानने की शपथ पर बवाल

मोहरा में राज्य स्तरीय बौद्ध सम्मेलन किया गया था आयोजन

हिन्दू संगठनों ने कलेक्टर एसपी को ज्ञापन सौंपकर समाज के पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग

राजनांदगांव.राज्य स्तरीय बौद्ध सम्मेलन का वीडियो वायरल होने के बाद शहर में बवाल हो गया है। सम्मेलन में बौद्ध समाज के पदाधिकारी मंच से लोगों को दिलाते हुए नजर आ रहे हैं, जिसमें हिंदू देवी-देवताओं को नहीं मानने की बात कह रहे हैं। वीडियो वायरल होने के बाद इस मामले ने तूल पकड़ लिया है। बुधवार को हिंदू संगठनों ने कलेक्टर और एसपी को ज्ञापन सौंपकर समाज के पदाधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

सम्मेलन में बौद्ध भंते लोगों को शपथ दिला रहे थे, जिसमें कहा जा रहा था कि ”मैं गौरी, गणपति और हिंदू धर्म के किसी भी देवी-देवताओं को नहीं मानूंगा और ना ही उनकी कभी भी पूजा करूंगा।मैं इस बात पर भी कभी विश्वास नहीं करूंगा कि ईश्वर ने कभी अवतार लिया है।” इस कार्यक्रम में प्रदेशभर से बौद्ध धर्मावलंबी और साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर के पोते भीमराव यशवंत राव अंबेडकर भी शामिल हुए थे।

इस बौद्ध सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह, पूर्व सांसद मधुसूदन यादव, नगर निगम महापौर हेमा देशमुख, राजगामी संपदा न्यास के अध्यक्ष विवेक वासनिक समेत कई जनप्रतिनिधि शामिल थे। हालांकि शपथ लेने के दौरान मंच पर कांग्रेस नेता ही खड़े थे। भाजपा के डाक्टर रमन सिंह और मधुसूदन यादव यहां से निकल गए थे।

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विवाद बढ़ने पर महापौर हेमा देशमुख की सफाई भी सोशल मीडिया पर आ गई है। उन्होंने कहा कि वे वहां बतौर अतिथि जरूर मौजूद थीं, लेकिन उन्होंने न तो हाथ उठाया और न ही शपथ ली।महापौर हेमा देशमुख ने कहा कि बौद्ध समाज राज्य स्तरीय सम्मेलन में बाबा साहब के पोते भीमराव यशवंत राव अंबेडकर भी आए हुए थे। कार्यक्रम के दौरान संविधान के बारे में चर्चा हो रही थी। मैं भी वहां अतिथि थी, साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह भी वहां मौजूद थे। कार्यक्रम के बीच में शपथ लेने की प्रक्रिया शुरू हुई, तो मुझे लगा कि यह संविधान की शपथ है। मुझे नहीं पता था कि यह भगवान के बारे में शपथ है।

सासंद संतोष पांडेय ने उठाए सवाल

राजनांदगांव सांसद संतोष पांडेय ने सरकार पर निधाना साधते हुए कहा कि राजगामी संपदा न्यास के अध्यक्ष पद पर आसीन विवेक वासनिक को तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिले में भगवान जगन्नाथ, राधा-कृष्ण समेत कई प्राचीन मंदिर हैं, जिन्हें पूरी संस्कारधानी पूजती है। ऐसे में ये शपथ दिलाकर यहां के सौहार्द्रपूर्ण माहौल को बिगाड़ने की कोशिश की गई है। शांत सरोवर में पत्थर फेंकने और जहर घोलने वालों से लोगों को सावधान रहना होगा।

प्रदेश सलाहकार वैष्णव समाज देव कुमार निर्वाणी ने कहा कि सभी वैष्णव राजा भगवान राम, कृष्ण, हनुमान एवं सभी हिन्दू देवी-देवताओं को मानने वाले सनातनी राजा थे। अगर बौद्ध समाज द्वारा सनातनी धर्म विचारों को मानने में विरोध है, तो महंत राजा बलराम दास की महारानी सूर्यमुखी देवी राजगामी संपदा से बौद्ध धर्म के प्रचारक विवेक वासनिक को खुद पद त्याग कर देना चाहिए, नहीं तो वैष्णव समाज वासनिक को राजगामी संपदा से पदमुक्त करने के लिए बड़ा आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।

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