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बाघिन की खाल की तस्करी मामले में पांच पुलिस कर्मियों की सेवा समाप्त

दंतेवाड़ा. छत्‍तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में मादा बाघ का शिकार करने और उसके खाल की तस्करी मामले में पांच पुलिस कर्मियों की सेवा समाप्‍त कर दी गई है। यह मामला जगदलपुर न्यायालय में विचाराधीन है।

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट इस मामले की सुनवाई कर रहे हैं। इस प्रकरण में बड़ी कार्रवाई बीजापुर से हुई है। फीमेल टाइगर की खाल की तस्करी में शामिल दो एएसआई संतोष बघेले और रमेश अंगनपल्ली, प्रधान आरक्षक 1406 अरुण मोडियम, आरक्षक 431 बाबूलाल मज्जी और सहायक आरक्षक पवन कुमतार नक्का की सेवा समाप्त कर दी गई है।

दतेवाड़ा एसडीओ अशोक सोनवानी का कहना है कि बीजापुर एसपी कार्यालय से जानकारी मांगी थी वहां से पत्र आया है। उस पत्र में पांच पुलिस कर्मी को सेवा से प्रथक कर देने की बात कही गई है। बता दे बाघ की तस्करी के मामले में ग्रामीणों के अलावा स्वास्थ्य कर्मी, शिक्षा विभाग से एक प्राचार्य और पुलिस कर्मियों का अहम रोल था। बैलाडीला के पीछे जाल में फंसा कर फीमेल टाईगर की जान ली गई थी।

 

हैदराबाद के लेबोरेटी से हुआ था मादा बाघ होने का खुलासा
वन अफसरों का कहना है कि जिस फीमेल टाइगर का शिकार किया गया। वह विशेष प्रजाति का था। मादा बाघ बौनी प्रजाति का था। उसकी उम्र करीब तीन वर्ष थी। कोशकीय एवं आणविक जीव विज्ञान केंद्र हैदराबाद सैंपल भेजा गया था। वहां से जो रिपोर्ट आई है उसमें फीमेल टाइगर होने की पुष्टि की गई है। बस्तर के घने जंगलों में इस विशेष प्रजाति के बाघ की पुष्टि भी पहली बार हुई है। यह तो स्पष्ट है कि बस्तर जंगल में बाघ है, लेकिन इस प्रजाति के बाघ भी यहां पाए जाते हैं।

2021 की घटना
12 मार्च 2021 को वन विभाग के अफसरों को बचेली से सूचना मिली थी कि वन्य जीव की तस्करी के फिराक में दो लोग हैं। सूचना के मुताबिक सीसीएफ मोहम्मद शाहिद और बस्तर एसपी ने पुलिस और वन विभाग की टीम के साथ आरोपियों को जगदलपुर दंतेश्वरी मंदिर के पास घेराबंदी कर तस्करों को फीमेल टाइगर के खाल के साथ गिरफ्तार किया था। आरोपी गाड़ी में बाहर भागने के फिराक में थे, लेकिन पुलिस की घेराबंदी से वे निकल नहीं पाए।

 

बैलाडीला ही पहाड़ी में फंदा लगा किया था शिकार

बैलाडीला पहाड़ के पीछे आर एफ 1834 और 1841 की सीमा या यूं कहे कि डिपोजिट 10 के नीचे पाढ़ापुर के रहने वाले बुधरू कुंजाम और भीमा इलामी ने शिकार के लिए फंदा लगाया था। इसके बाद वे जब दो दिन बाद पहुंचे तो मादा बाघ को फंसा पाया उसकी दहाड़ की दहशत ने इन दोनों को भागने पर मजबूर कर दिया। बुधरू और भीमा तीन दिन के बाद एक बार फिर देखने जाते है तो मादा बाघ भूख और प्यास से तड़प कर दम तोड़ चुकी थी। इसके बाद इन दानों ने उसकी खाल को निकाला और उसको पंखे की जाली में रखा। इस जाली को धूप में पेड़ पर बांध दिया। जब यह पूरी तरह से सूख गई तब तस्‍करी का प्लान किया।

शिकार करने वाले आरोपी 
हरप्रसाद गावड़े व सुरेंद्र कुमार देवांगन, बाबूलाल मज्जी, अरुण मोडियम, भोजराम ठाकुर, पवन कुमार नक्का, राकेश हेमला, अनिल नक्का, संतोष बघेल, रमेश अंगना पानी, बुधरू कुंजाम, भीमा इलामी, रामलाल तामो रामेश्वर सोनवानी और गुप्तेश्वर ठाकुर मादा शेरनी के शिकार के आरोपी है।

 

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