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शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती 98 साल की उम्र में देवलोक गमन,हिंदुओं का माना जाता था सबसे बड़ा धर्मगुरु

शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के निधन पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जताया दुख

कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने ट्‌वीट कर किया नमन

द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने आज 98 साल की आयु में अंतिम सांस ली। उन्होंने मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के झोतेश्वर स्थित परमहंसी गंगा आश्रम में माइनर हार्ट अटैक आने के बाद दोपहर 3 बजकर 50 मिनट पर अंतिम सांस ली। स्वरूपानंद सरस्वती को हिंदुओं का सबसे बड़ा धर्मगुरु माना जाता था।शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की पार्थिव देह पर चंदन लगाकर उनके शिष्य अंतिम श्रंगार करके अंतिम दर्शन के लिए रखेंगे।

मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर जताया दु:ख

जगद्गुरु शंकराचार्य श्री स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी के देवलोकगमन पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने कहा है कि स्वरूपानंद जी के देवलोकगमन का समाचार अत्यंत दुःखद हैं। उनमें देश और देश के जनमानस को लेकर गहरी समझ थी।

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शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती

कृषि मंत्री रविन्द्र चौबे ने जताया दुख

आहत हूँ, स्तब्ध हूँ, निःशब्द हूँ, क्योंकि यह मेरे लिए अपूर्णीय क्षति है। मेरे गुरुदेव, मेरे मार्गदर्शक, सनातन संस्कृति के ध्वजवाहक परमपूज्य शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी का दुःखद निधन पाकर मन विचलित है। परम आदरणीय गुरुजी को सादर नमन, सादर प्रणाम!

शंकराचार्य काफी समय से बीमार चल रहे थे। कुछ दिनों पहले ही बंगलुरू के अस्पताल से आश्रम लौटे थे। शंकराचार्य के शिष्य ब्रह्म विद्यानंद ने बताया स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को सोमवार को शाम 5 बजे परमहंसी गंगा आश्रम में समाधि दी जाएगी। स्वामी शंकराचार्य आजादी की लड़ाई में जेल भी गए थे। उन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए लंबी कानूनी लड़ाई भी लड़ी थी।

आश्रम में देंगे समाधि
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती को भी भू-समाधि उनके आश्रम में दी जाएगी।शैव, नाथ, दशनामी, अघोर और शाक्त परम्परा के साधु-संतों को भू-समाधि दी जाती है। भू-समाधि में पद्मासन या सिद्धि आसन की मुद्रा में बैठाकर भूमि में दफनाया जाता है। अक्सर यह समाधि संतों को उनके गुरु की समाधि के पास या मठ में दी जाती है।

9 साल में उम्र में छोड़ दिया था घर
शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने 9 साल की उम्र में घर छोड़कर धर्म की यात्रा शुरू कर दी थी। वो काशी पहुंचे और यहां ब्रह्मलीन स्वामी करपात्री महाराज से वेद-वेदांग, शास्त्रों की शिक्षा ली।

सिवनी जिले के रहने वाले थे स्वामी जी

शंकराचार्य श्री स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती का जन्म मध्यप्रदेश के सिवनी जिले के दिघोरी गांव में ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनके माता-पिता ने बचपन में इनका नाम पोथीराम उपाध्याय रखा था।

19 साल की उम्र में बने थे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी
जब 1942 में अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन का ऐलान हुआ तो स्वामी स्वरूपानंद भी आंदोलन में कूद पड़े। 19 साल की आयु में वह क्रांतिकारी साधु के रूप में प्रसिद्ध हुए। उन्हें वाराणसी में 9 महीने और मध्यप्रदेश की जेल में 6 महीने कैद रखा गया। जगदगुरु शंकराचार्य का अंतिम जन्मदिन हरितालिका तीज के दिन मनाया गया था।

1981 में शंकराचार्य की उपाधि मिली
स्वामी स्वरूपानंद 1950 में दंडी संन्यासी बनाए गए थे। ज्योर्तिमठ पीठ के ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी ब्रह्मानन्द सरस्वती से दण्ड सन्यास की दीक्षा ली और स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती नाम से जाने जाने लगे। उन्हें 1981 में शंकराचार्य की उपाधि मिली।

राम मंदिर के नाम पर दफ्तर बनाने का आरोप लगाया था
शंकराचार्य स्वामी स्परूपानंद सरस्वती ने राम जन्मभूमि न्यास के नाम पर विहिप और भाजपा को घेरा था। उन्होंने कहा था- अयोध्या में मंदिर के नाम पर भाजपा-विहिप अपना ऑफिस बनाना चाहते हैं, जो हमें मंजूर नहीं है। हिंदुओं में शंकराचार्य ही सर्वोच्च होता है। हिंदुओं के सुप्रीम कोर्ट हम ही हैं। मंदिर का एक धार्मिक रूप होना चाहिए, लेकिन यह लोग इसे राजनीतिक रूप देना चाहते हैं जो कि हम लोगों को मान्य नहीं है।

राम मंदिर ट्रस्ट में वासुदेवानंद सरस्वती को जगह देने पर नाराज थे
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में ज्योतिर्मठ पीठ के शंकराचार्य के रूप में वासुदेवानंद सरस्वती को जगह देने पर भी शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने चार फैसलों में वासुदेवानंद सरस्वती को न शंकराचार्य माना और न ही सन्यासी माना है। ज्योतिर्मठ पीठ का शंकराचार्य मैं हूं। ऐसे में प्रधानमंत्री ने ज्योतिर्मठ पीठ के शंकराचार्य के रूप में वासुदेवानंद सरस्वती को ट्रस्ट में जगह देकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना की है।

पीएम मोदी समेत कई नेताओं ने जताया दुख

पीएम नरेंद्र मोदी शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के निधन पर शोक जताते हुए उनके अनुयायियों के प्रति संवेदनाएं व्यक्त कीं। गृहमंत्री अमित शाह ने कहा- सनातन संस्कृति व धर्म के प्रचार-प्रसार को समर्पित उनके कार्य सदैव याद किए जाएंगे। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट किया- शारदापीठ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती सनातन धर्म के शलाका पुरुष एवं सन्यास परम्परा के सूर्य थे।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के निधन को संत समाज की अपूर्णीय क्षति बताया है। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने कहा- शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने धर्म, अध्यात्म व परमार्थ के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया।

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