Homeपंचांग-पुराणश्रावण सोमवार:पार्थिव शिवलिंग की पूजा को बनाएं फलदाई,करें ये उपाय

श्रावण सोमवार:पार्थिव शिवलिंग की पूजा को बनाएं फलदाई,करें ये उपाय

आज से सावन शुरू, घरों में करें पार्थिव शिवलिंग की पूजा

Shraavan Somavaar:हिन्दू धर्म में श्रावण माह को सबसे उत्तम माना गया है। पौराणिक मान्यता है कि इस माह में जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से देवों के देव महादेव और देवी पार्वती की पूजा अर्चना करते हैं। महादेव उसकी मनोकामना अवश्य पूरी करते हैं, तो आइए आचार्य शंभूनाथ तिवारी से जानते हैं श्रावण सोमवार की पूजा अर्चना को फलदाई बनाने के लिए किस तरह के उपाय करें और पूजा के लिए कौन सी सामग्री है जरूरी ….

आज से पार्थिव शिवलिंग की पूजा शुरू

आज यानी 14 जुलाई से श्रावण माह शुरू हो गया है। आज से ही घरों में पार्थिव (मिट्‌टी )शिवलिंग पूजा शुरू किया जा सकता है। श्रावण का पहला सोमवार 18 जुलाई को पड़ेगा। इस बार माह में कुल चार सोमवार पड़ेंगे। इन चारों सोमवार को श्रद्धालु कुछ खास सामग्रियों के साथ महादेव और माता पार्वती की पूजा अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

पूजा सामग्री-पूजा के लिए खड़ा चावल, चने की दाल, धतूरा के फूल, नीले रंग का फूल, दूर्वा, पांच प्रकार के फल (आलू, केला, दतूरा, बेल,आम), पंच मेवा, रत्न, सफेद वस्त्र, सोना, चांदी, दक्षिणा, पूजा के बर्तन, आसन,गाय का कच्चा दूध, दही, शुद्ध देशी घी, शहद, गंगाजल, पवित्र जल, शक्कर या गन्ने का रस, गुलाल, इत्र, गंध रोली, मौली धागा, जनेऊ, पंच मिष्ठान्न, बिल्वपत्र, शमी के पत्ते,धतूरा, भांग, बेर, आम्र मंजरी, मंदार पुष्प, कपूर, धूप, दीप, रूई, सफेद या रक्त चंदन, शिव व मां पार्वती की श्रृंगार सामग्री लें।

chhattisgarh
महादेव की पूजा करते हुए श्रद्धालु

सुबह 5 बजे उठ जाएं

श्रावण सोमवार के दिन सुबह 5 तक उठकर नदी या सरोवर में स्नान करना चाहिए। आसपास सरोवर न हो तो घर पर ही स्नान कर सकते हैं। नदी से जल लेकर आएं। पंचाक्षरी मंत्र ” ऊं नम: शिवाय” का जाप करते हुए भगवान शिव का जलाभिषेक करें। साथ ही देवी पार्वती और नंदी को भी गंगाजल या दूध चढ़ाएं।

पंचामृत से जलाभिषेक करें

कपूर, शक्कर या गन्ने का रस, मधुरस, दूध, दही, घी से बम-बम भोले, हर-हर महादेव का जाप करते हुए अभिषेक करें। फिर गंगा जल से हर-हर महादेव का जाप करते हुए अभिषेक करें। गंध, चंदन से तिलक लगाएं । बिल्व पत्र और शमी पत्र अर्पित करें। शिवलिंग पर धतूरा, भांग, आलू, चंदन, चावल और चने की दाल चढ़ाएं। इसके बाद शिव जी के साथ माता पार्वती और गणेश जी को तिलक लगाएं और शिव चालीसा का पाठ करें।

आरती के बाद भोग लगाएं 
प्रसाद के रूप में भगवान शिव को घी-शक्कर का भोग लगाएं। आखिर में धूप, दीप से भगवान भोलेनाथ की आरती करें और पूरे दिन फलाहार हर कर शिव जी का स्मरण करते रहें।

यह भी पढें: हरितालिका : इस उपाय करें भगवान शिव और माता पार्वती पूजा, मिलेगा अत्यधिक फायदा

कोरोना संक्रमण की वजह से कांवड़ यात्रा पर प्राचीन शिव मंदिरों में जलाभिषेक पर प्रतिबंध था। इस वजह से पिछले दो साल से कांवड़ यात्रा बंद थी। इस बार स्थिति सामान्य है और प्रतिबंध की स्थिति भी नहीं है। ऐसे में माना जा रहा है इस बार कांवड़ यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ेगी। इसी बात को ध्यान में रखते हुए मंदिर समिति और प्रशासन ने अपनी तैयारी शुरू कर दिया है।

RELATED ARTICLES

Most Popular

error: Content is protected !!