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कांग्रेस के दो नेताओं की आपसी लड़ाई की कहानी, पढ़िए उन्ही की जुबानी

भिलाई. कांग्रेस के दो नेताओं की आपसी लड़ाई इन दिनों टिवनसिटी की सुर्खियों में बना हुआ है। सड़क पर पार्किंग को लेकर शुरू हुए आपसी मनमुटाव अब इतना बढ़ गया है कि दोनों नेता आमने-सामने हो गए हैं। दोनों ही एक-दूसरे पर कई तरह के आरोप प्रत्यारोप लगा रहे हैं। आरोप प्रत्यारोप के बीच कई तरह की बाते सामने आ रही है, तो आइए जानते हैं कांग्रेस नेता व होटल व्यावसायी सुभाष साव और नगर पालिक निगम के पूर्व सभापति राजेन्द्र सिंह अरोरा के बीच चल रहे आरोप प्रत्यारोप की आपसी लड़ाई की कहानी, उन्ही की जुबानी…

पूर्व निगम सभापति राजेन्द्र सिंह अरोरा ने पुलिस की जांच से संबंधित वीडियो उपलब्ध कराते हुए होटल व्यावसायी सुभाष साव के द्वारा पांच लाख रुपए मांगने के आरोप न केवल को खारिज किया, बल्कि पुलिस से सुरक्षा की गुहार लगाते हुए होटल व्यावसायी द्वारा भविष्य में इसी तरह से झूठा प्रकरण में फंसाने की आशंका भी जाहिर की है, तो वहीं होटल व्यावसायी सुभाष साव ने पुलिस की जांच पर सवाल उठाया है। दानपेटी में डाले गए राशि को मेनुपुलेट करने के लिए अरोरा को समय देने का आरोप लगाया है।

केस वापस लेने का सवाल ही नहीं

अरोरा ने होटल व्यावसायी सुभाष साव द्वारा बैकुंठधाम मंदिर के दान पत्र में 5100 डालकर पांच लाख रुपए मांगने के आरोप को मनगढ़ंत कहानी और झूठा बताया है। उन्होंने मीडिया से कहा कि होटल व्यावसायी साव ने बैठुंकधाम मंदिर को बदनाम करने की नीयत से ऐसा किया है। जबकि बैकुंठधाम मंदिर समिति अलग है। वह केवल संरक्षक है। पैसे को लेकर न उनसे कभी बात की है और न ही इस संबंध में किसी से कुछ कहा है। उन्होंने मुझे फंसाने के लिए ऐसा किया है ताकि मैं जनहित याचिका को वापस ले लूं, लेकिन मैं केस वापस लेने वाला नहीं हूं। मैंने जनता के हित के लिए होटलों से जुड़े पार्किंग के विषय पर जनहित याचिका लगाई है और मामला न्यायालय में है।

अरोरा ने पत्रकारवार्ता में यह भी कहा कि जनहित याचिका को वापस लेने के लिए होटल के संचालक सुभाष साव द्वारा कई लोगों के माध्यम से मेरे पर दबाव डलवाया गया। जब मैंने मामले को वापस लेने से मना कर दिया तब झुब्ध होकर सुपेला में पांच लाख रुपए मांगने का आरोप लगाते हुए ब्लैकमेल करने की शिकायत की। जिसमें होटल व्यावसायी साव ने ही पुलिस जांच के बाद ने उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की। जिस पर उच्च न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के रुलिंग एक्ट को लेकर कोई भी संज्ञेय अपराध हवाला देते हुए चाहे कोई भी प्रकरण हो, केस दर्ज करने के बाद ही जांच एवं खात्मा का करने का उल्लेख किया। न कि मेरे प्रकरण में कोई आदेश दिया। पुलिस ने उच्च न्यायालय के उसी निर्देश पर 25 जून को सुपेला थाना में अपराध पंजीबद्ध किया गया। इस पर मुझे जिला एवं सत्र न्यायालय से अग्रिम जमानत मिल गई है।

एसपी से साव के खिलाफ झूठे केस में फंसाने से जुड़े शिकायत के सवाल पर अरोरा ने कहा कि, अब मुझे यह आशंका हो रही है कि तीन होटलों के संचालक सुभाष साव मुझे झूठे केस में पहुंचा सकते हैं। जान माल की क्षति पहुंचा सकते है। इसलिए मैंने पुलिस अधीक्षक के समक्ष आवेदन प्रस्तुत मेरे एवं मेरे परिजनों के विरूद्ध सुभाष साव या उनके परिजनों द्वारा कोई शिकायत की जाती है तो उस पर कार्रवाई करने से पहले मुझे अपना पक्ष रखने का अवसर देने की मांग की है।

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जांच में सच्चाई आएगी सामने

होटल व्यवसायी सुभाष साव द्वारा केस को वापस लेने के एवज में पैसा मांगे जाने के आरोप का जवाब देते हुए अरोरा ने कहा जांच में सच्चाई सामने आ जाएगी। दानपेटी की जांच का वीडियो सामने है। उनकी शिकायत और न्यायालय के आदेश पर पुलिस जांच के लिए बैकुंठधाम मंदिर पहुंची और दानपेटी खुलवाया तो होटल अमित इंटरनेशनल के लिफाफे में सिर्फ पांच हजार एक सौ रुपए ही मिले। इससे साबित होता है कि उसने झूठी शिकायत की है, मंदिर को बदनाम करने की नीयत से ऐसा प्रापेगैंडा किया है। बता दें कि होटल व्यावासी सुभाष साव ने कुछ दिन पहले अरोरा और दिवाकर भारती पर होटल के बेसमेंट में पार्किंग को लेकर ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया था। दिवाकर भारती द्वारा बैकुंठधाम मंदिर में एक लाख रुपए दान पेटी में डालने के लिए कहा था। साव ने उनके कहे अनुसार दान पेटी में पैसे डालने और बाद में पांच लाख की डिमांड करने का आरोप लगाया था। इसी मामले की उन्होंने पुलिस से शिकायत की थी।

 एक लाख का 5100 कैसे हुआ ये जांच का विषय

इस संबंध में होटल व्यावसायी सुभाष साव का कहना है कि एक लाख का 5100 कैसे हो गया,ये पुलिस के लिए जांच का विषय है। क्योंकि 27 मई को लिफाफा डाला गया और 2 तारीख की शिकायत की, तो पुलिस को तत्काल एक्शन लेना चाहिए था, लेकिन पुलिस ने ऐसा नहीं किया। उन्हें पैसे का मेनुपुलेशन करने का मौका दिया गया। साव करना है कि शहर में कई बड़े बड़े कॉम्प्लेक्स है। उनके खिलाफ क्यों नहीं गया। एक व्यक्ति को क्यों टारगेट किया गया। ये भी जांच का विषय है।

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