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अपनी गलती छात्र पर थोप रहा था विवि, न्यायालय के आदेश पर एग्जाम में बैठने की दी अनुमति

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने हेमचंद विश्वविद्यालय दुर्ग के एक प्रकरण में महत्वपूर्ण फैसला दिया है। न्यायालय ने एलएलबी फाइनल सेमेस्टर के छात्र रोहन कुमार को परीक्षा में बैठने की बड़ी राहत दी है। न्यायालय ने इस मामले में 6 जून को सुनवाई की और विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्र को परीक्षा में बैठने की अनुमति प्रदान करने के आदेश दिए। न्यायालय के आदेश पर विवि प्रशासन ने छात्र को एलएलबी फाइनल सेमेस्टर के एग्जाम में बैठने की अनुमति दे दी है।

हेमचंद यादव विवि प्रशासन ने एलएलबी फाइनल सेमेस्टर के छात्र को वेबसाइट की तकनीकी त्रुटि का हवाला देते हुए 6th semester दिसंबर 21-जनवरी 2022 के एग्जाम में बैठने से रोक दिया था। विवि के इस फैसले को लेकर छात्र कई बार विवि के कुलपति और कुलसचिव से मिले और अपनी बात रखी, लेकिन विवि प्रशासन ने तकनीकी त्रुटि बताते हुए उनके आवेदन पर विचार ही नहीं किया। इससे परेशान छात्र ने हाईकोर्ट की शरण ली। जहां उनकी याचिका पर न्यायधीश गौतम चौरड़िया ने समर वैकेशन में 6 सुनवाई की। न्यायालय ने विवि प्रशासन को 6 जून से शुरू हो रहे एलएलबी 6 सेमेस्टर के एग्जाम में छात्र को बैठने की अनुमति प्रदान करने के आदेश दिए।

ऐसे समझें पूरे मामले को

छात्र की पैरवी करने वाले अनमोल शर्मा ने बताया कि 2020 में विवि प्रशासन ने कोरोना कॉल में ऑनलाइन एग्जाम कंडक्ट किया। छात्र ने विवि का वेबसाइट ओपन होने पर एक साथ चार सेमेस्टर का ऑनलाइन फार्म भरा और फीस भी जमा किया। विवि ने विवि प्रशासन ने मंजूरी देते हुए ऑनलाइन एग्जाम में बैठने की अनुमती दी। छात्र ने सभी सेमेस्टर के एग्जाम उत्तीर्ण मई -जून 2020 में क्लीयर भी कर लिया।

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इसके बाद 2021 में छात्र ने 5th Semeter के लिए रेगुलर फार्म भरा और ऑनलाइन परीक्षा में शामिल हुए तो उसमें वह फेल हो गया। छह महीने बाद फिर से उन्होंने 5th सेमेस्टर का एग्जाम दिया। जिसमें वह उत्तीर्ण हो गया, लेकिन विवि ने उनके मार्कशीट में WH लिख दिया। जिसे छात्र ने आवेदन देकर सुधरवाया और जब 6th semester का एग्जाम देने के लिए फार्म भरा तो विवि ने सालभर पहले हुई गलती को लेकर उन्हें परीक्षा में बैठने की अनुमति देने से रोक दिया।

एक साथ नहीं दे सकते चार सेमेस्टर के एग्जाम

विवि प्रशासन का कहना था कि 2020 में एक साथ केवल तीन सेमेस्टर का एग्जाम दिया जा सकता है, लेकिन छात्र ने 2020 में एक साथ चार सेमेस्टर का एग्जाम दिया है। इस वजह से उन्हें परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दिया जा सकता। जबकि छात्र का कहना है कि विवि का वेबसाइट खुला था।उसने ऑनलाइन फार्म सबमिट किया, फीस जमा किया और परीक्षा भी दिया। तब विवि प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया। करीब दो साल बाद त्रुटि का हवाला देकर उन्हें फिर से चौथे सेमेस्टर का परीक्षा देने के लिए कहा जा रहा है और परीक्षा देने से वंचित किया जा रहा है। विवि की इसी त्रुटि को उन्होने आधार बनाते हुए न्यायालय से सुनवाई की मांग की। जिस पर न्यायालय ने वैकेशन सत्र में सुनवाई की और छात्र हित में फैसला दिया है।

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बात काम की

पूरा सिस्टम डिजिटल की ओर बढ़ रहा है, लेकिन उस हिसाब से उच्चशिक्षा संस्थानों में आज भी तकनीकी ज्ञान रखने वालों की कमी है। इसी कमी को दूर करने के लिए ईमानदार प्रयास नहीं हो रहा है। ठेके पर काम चल रहा है। इस पर मानिटरिंग नहीं होने की वजह से ऑनलाइन वर्क में छोटी-छोटी त्रुटियां छात्र-छात्राओं के लिए मुसीबत बन जाती है और छात्र छात्राएं पढ़ाई लिखाई छोड़ विवि के बाबूओं के दफ्तर का चक्कर लगाते रहते हैं। इसलिए विश्वविद्यालयों को चाहिए कि इस तरह की तकनीकी त्रुटि की पुनरावृत्ति न हो। ताकि किसी और छात्र को इस तरह की त्रुटियों के लिए न्यायालय की शरण लेना पड़े।

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