डेयरी व्यवसाय शुरू करने वालों को विवि करेगा सहयोग

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  • डेयरी पालन विषय पर राज्य स्तरीय पांच दिवसीय कृषक प्रशिक्षण का समापन

दुर्ग @ news-36. श्री वासुदेव चंद्राकर कामधेनु विश्वविद्यालय दुर्ग के अंतर्गत संचालित पशु चिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय अंजोरा डेयरी का व्यावसाय शुरू करने वाले पशुपालक और किसानों का प्रोजेक्ट बनाने में सहयोग करेगा। जिससे वह बैंक से ऋण भी प्राप्त कर सकता है और शासन की योजना का लाभ भी उठा सकता है। उक्त बातें विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलपति एवं निदेशक शिक्षण डॉ.एस.पी. इंगोले ने पिछले पांच दिनों से चल रहे कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन अवसर पर कही।

डाॅ इंगोले ने कहा कि, उन्हें आशा ही नहीं, बल्कि विश्वास है कि यह प्रशिक्षण पशुपालक और किसानों के लिए लाभदायी सिद्ध होगा। अपने व्यावसाय को आगे बढ़ाने की दिशा में कार्य करेंगे। वहीं कार्यक्रम के मुख्य आयोजक एवं महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. एस.के.तिवारी ने नए डेयरी व्यवसाय शुरू करने से पहले कुछ जरूरी बातों को ध्यान रखने कहा। डेयरी परियोजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी। विशिष्ट अतिथि डॉ. सुशोवन राय ने पशुओं में होने वाले रोगों की जांच की महाविधालय में उपलब्ध सुविधाओं के बारे में बताया।

नोडल अधिकारी डॉ धीरेंद्र भोंसले ने बताया कि प्रशिक्षण में न केवल राज्य के बल्कि अन्य प्रदेशों के प्रशिक्षणार्थियों ने ऑनलाइन एवं ऑफलाइन मोड में जुड़े रहे। उन्होंने आगे कहा कि टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का महत्वपूर्ण कार्य इस प्रशिक्षण के द्वारा किया गया।वहीं प्रिज्म ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर रूपेश गुप्ता ने प्रशिक्षण को महत्वपूर्ण एवं उपयोगी बताया। इस अवसर पर सभी प्रशिक्षणार्थियों को चारा उत्पादन के लिए सुपर नेपियर नोड्स वितरण किया गया। कार्यक्रम में जनसंपर्क अधिकारी डॉ.दिलीप चौधरी, डॉ. निषिमा सिंह, डॉ. शिवेश देशमुख ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. श्रीमती किरण कुमारी एवं धन्यवाद डॉ. श्रीमती रूपल परमार ने जताया। बता दें कि प्रशिक्षण कार्यक्रम में 125 से अधिक पशुपालक और किसानों ने हिस्सा लिया। इसके अलावा कुछ पशुपालक ऑन लाइन कार्यक्रम में शामिल हुए।

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