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लिफ्ट में हुई घटना का वीडियो वायरल, लोग उठा रहे हैं कई तरह के सवाल

वायरल वीडियो

भिलाई नगर पालिक निगम के पाश काॅलोनी चौहान टाउन के लिफ्ट में हुई घटना का वीडियो वायरल हुआ है। इस वीडियो को लेकर कई तरह की चर्चा हो रही है। इसे लेकर कई तरह के उठा रहे हैं सवाल।

दरअसल चौहान टाउन सोसायटी के लिफ्ट की घटना 14 जून की शाम की है। लिफ्ट का दरवाजा बंद हुआ ही नहीं था कि लिफ्ट शुरू हो गई थी। जिसके चपेट में आने से 60 वर्षीय सावित्री देवी का पैर फंस गई। पांचवे फ्लोर के पहुंचने तक उनका दोनों पैर लिफ्ट और दीवार के बीच फंसे रहा। महिला को वहां से बाहर निकलने के लिए टीम काफी मशक्कत करनी पड़ी। गंभीर हालत में उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां उनका इलाज चल रहा है। दर्दनाक घटना सीसीटीवी में कैद हो गया है।विद्युत सेफ्टी डिपार्टमेंट की टीम ने जैसे ही इस मामले की जांच शुरू की, घटना का वीडियो वायरल हो गया।

वीडियो में लिफ्ट के बाहर चार लोग कुछ सेंकंड तक इंतजार करते दिख रहे हैं। जिसमें सावित्री देवी का बेटा, बहु और नातिन है। जब का लिफ्ट का दरवाजा खुला तो लिफ्ट के अंदर कोई नहीं था। महिला का बेटा पहले लिफ्ट के अंदर गया, फिर बहु और नातिन गए। तब तक महिला लिफ्ट का दरवाजा पकड़े बाहर थी, जैसे ही महिला अंदर गई, लिफ्ट चालू हो गई और चलने लगी। इससे महिला हड़बड़ा कर लिफ्ट के फ्लोर पर गिर गई। दरवाजा बंद नहीं होने की वजह से उनका पैर लिफ्ट और दीवार के बीच फंस गई।

घटना का वीडियो वायरल होने के बाद लोग कई तरह के सवाल यह उठा रहे हैं कि आखिर लिफ्ट का दरवाजा बंद हुए बिना और बटन दबाए बिना कैसे चालू हो गई। क्योंकि उन्हें लिफ्ट में चढ़ने के लिए कुछ सेकेंड इंतजार किया। उसके बाद ही लिफ्ट का दरवाजा खुला और फिर अंदर गए। दरवाजा बंद हुआ ही नहीं था कि लिफ्ट चालू हो गया। जबकि दरवाजा बंद हुए बिना और बटन दबाए बिना लिफ्ट अमूमन चालू नहीं होता। इसीलिए लोगों को लग रहा है कि लिफ्ट के अंदर पहले पहुंचने वाले व्यक्ति ने 5 नंबर का बटन दबा दिया होगा। इसलिए लिफ्ट स्टार्ट हो गई और सीधे पांचवी मंजिल में जाकर रूकी। नहीं तो लिफ्ट आखिरी फ्लोर तक जा सकती थी। वहां जाकर रूकती या फिर वहां से फिर रिटर्न ग्राउंड फ्लोर पर आ सकती थी।

कुछ लोगों का यह भी है कि यदि लिफ्ट में तकनीकी खराबी थी, तो किसी ने इसकी शिकायत संचालक या सुरक्षा गार्ड से क्यों नहीं की। अगर किया है तो कब शिकायत की थी। शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई। इस बिन्दू पर भी जांच किया जाना चाहिए। क्योंकि इस बिल्डिंग के पांचवे और छठवें माले में लोग रहते हैं। हर आधा एक घंटा के अंतराल में रहवासियों का ऊपर से नीचे आना जाना लगा ही रहता है। तकनीकी खराबी की स्थिति में तो कोई न कोई शिकायत जरूर करता। यदि लिफ्ट को लेकर कोई शिकायत नहीं है तो फिर लिफ्ट का बटन किसने दबाया यह जांच का विषय है।

जानिए क्या है ऑटाेमेटिक डिवाइस

एआरडी लिफ्ट में महत्वपूर्ण डिवाइस है। जैसे ही बिजली गुल होती है यह डिवाइस पांच सैकेंड के अंदर नजदीकी फ्लोर पर पहुंचा देती है। डिवाइस पावर कट होने पर आटोमेटिक काम करता है। और लिफ्ट के अंदर फंसे लोगों को नजदीक के तल पर पहुंचाता है। हर 15 दिन के अंदर डिवाइस की जांच होनी चाहिए। इसकी जांच करने की जिम्मेदारी लिफ्ट संचालक और विद्युत सुरक्षा विभाग की है, जिन्होंने लिफ्ट और जेनरेटर लगाने के लिए एनओसी प्रदान किया है।

सेफ्टी टीम कर रही है जांच

इस मामले में इलेक्ट्रीसिटी बोर्ड की सेफ्टी डिपार्टमेंट की टीम जांच कर रही है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा। घटना के बाद कॉलोनी के लोग आए थे, लेकिन किसी ने लिखित शिकायत नहीं दिया है।

डॉ अभिषेक पल्लव, एसपी, दुर्ग

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