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अजब-गजब : सुरही नदी तट पर ऐसा क्या है कि यहां पहुंचते ही सभी बाराती बन गए पत्थर की प्रतिमाएं, आइए जानते हैं जिंदा आदमी से पत्थर बनने की रहस्मयी कहानी

ताराचंद सिन्हा बेमेतरा @ News-36.सुरही नदी तट पर एक टीले में प्राचीन व अनूठा जुड़वा मंदिर है। जहां बजरंगबली और नगर देवता राजा घुघुस विराजमान है। यह मंदिर करीब 300 साल पुराना है। इस मंदिर के बारे में यह किवदंती है कि, राजा और उनके सैनिक दैवी श्राप की वजह से शिला (पत्थर की प्रतिमाएं) बन गए हैं।
@ News-36.आइए जानते हैं राजा के सैनिक रातोंरात कैसे बन गए प्रतिमाएं
जनश्रुति के अनुसार राजा घुघुस अपने सैनिकों के साथ सुरही नदी के मार्ग से पूर्व दिशा की ओर बारात जा रहे थे। रात होने पर राजा सैनिकों के साथ देवकर में नदी तट पर विश्राम करने के लिए रूके और जैसे ही राजा तंबू के नीचे जाकर बैठा। उनके सैनिक प्रस्तर (पत्थर) बन गए। जो जिस अवस्था मेें थे। वे वैसे ही प्रतिमा बन गए। जो घोड़ा में सवार थे, उनकी वैसे ही प्रतिमा बन गई। सैनिक जो भाला और ध्वज लिए हुए आगे बढ़ रहे थे। वह भी उसी रूप में प्रतिमा बन गए

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इसके बारे में यह किवदंती है कि दैवी श्राप की वजह से ऐसा हुआ होगा। इसका प्रमाण, प्राचीन मंदिर प्रांगण में मौजूद है। इसके अलावा मंदिर परिसर के आसपास भी कुछ प्रतिमाएं देखी जा सकती है। हालांकि समय के साथ उस स्थल की भौगोलिक स्थिति में काफी बदलाव हो गया है। पहले खुली जगह थी। अब बस्ती बस जाने की वजह से कई प्रतिमाएं गायब हो गई हैं, लेकिन शिला और आलेख छत्तीसगढ़ पुरात्व विभाग के संरक्षण में हैं।
@ News-36.इसलिए पूज्य है राजा घुघुस
मंदिर के पुजारी राधेश्याम मरकाम बताते हैं कि, देवकरवासियों का आस्था इस मंदिर से इसलिए जुड़ी हुई है क्योंकि यहां संकट मोचक हनुमान जी विराजमान है। साथ ही लोगों का यह भी मानना है कि इस प्राचीन मंदिर से आधी रात घोड़े का दल नगर की पहरेदारी करने लिए निकलता है। राजा के सैनिक कस्बा के चारों दिशाओं का भ्रमण करते हैं। सैनिकों के इन गतिविधियों को अब तक नगर का कोई भी व्यक्ति खुली आंखो से देख तो नहीं पाया, लेकिन आसपास के रहवासियों ने रात में घोड़ों की चलने और घुंघरू की आवाज को कई बार सुना गया है।

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@ News-36.जानिए राजा घुघुस के बारे में
महाराज घुघुस कहां के राजा थे और कहां जा रहे थे। इस बारे में छत्तीसगढ़ पुरातत्व विभाग के पास कोई लिखित प्रमाण है। परिसर में एक स्तंभ और शिलालेख हैं। जिसमें कुछ वाक्य लिखी हुई है। जिसे अभी तक कोई नहीं पढ़ पाया। छत्तीसगढ़ एवं पुरातत्व विभाग के अनुसार ये दोनों मंदिर 17-18वीं शताब्दी में निर्मित हुए हैं। एक मंदिर के गर्भगृह में घिसे मुखवाली नृसिंह प्रतिमा विराजमान हैं। जिसे स्थानीय लोग घुघुस राजा(आदिवासी मिथक के नायक ) के रूप में मानते हैं। दूसरे मंदिर में हुनमान जी की प्रतिमा स्थापित है।

@ News-36.दर्शन के लिए जरूर पधारें देवकर
यह मंदिर बेमेतरा जिला मुख्यालय से दुर्ग रोड पर 30 किलोमीटर की दूरी और दुर्ग से 45 किलोमीटर दूर, बेमेतरा स्टेट हाइवे-7 पर नगर पंचायत देवकर में स्थित है। यहां प्राचीन श्रीराम मंदिर है। जहां प्रभु श्रीराम चारों भाई,रानियों सहित विराजमान है। प्रभु श्रीराम वनवासी औ राजसी रूप में विराजमान है। इसके अलावा भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा भी विराजित है। परिसर में छोटे-बड़े पांच मंदिर है। इन सभी मंदिरों में हनुमान जी विराजमान है।

@News-36.Surhi River Deokar

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